भागलपुर, 9 जुलाई (आईएएनएस)। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) की ओर से 9 और 10 जुलाई को दो दिवसीय ‘4 मिनट रिसर्च फाइंडिंग्स प्रतियोगिता 2026′ का आयोजन हो रहा है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्देश्य स्नातकोत्तर और पीएचडी के विद्यार्थियों को अपने शोध कार्य और निष्कर्षों को मात्र चार मिनट में सरल, संक्षिप्त और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर देना है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, इस पहल का मकसद विद्यार्थियों की वैज्ञानिक संचार क्षमता को विकसित करना और गुणवत्तापूर्ण शोध के प्रभावी प्रसार को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ के साथ सूखे फूलों से तैयार हस्तनिर्मित कार्ड देकर किया गया। ये कार्ड बिहार कृषि विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, सबौर की छात्राओं ने तैयार किए थे।
उद्घाटन सत्र में आईक्यूएसी के निदेशक डॉ. तीर्थार्थ चट्टोपाध्याय ने बताया कि प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न संघटक महाविद्यालयों के कुल 55 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है। इनमें बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर, नालंदा उद्यान महाविद्यालय, नूरसराय, मंडन भारती कृषि महाविद्यालय, सहरसा, डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, किशनगंज और वीर कुंवर सिंह कृषि महाविद्यालय, डुमरांव के विद्यार्थी शामिल हैं।
प्रतियोगिता में आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन, आणविक जीवविज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी, मृदा विज्ञान, सस्य विज्ञान, कृषि अर्थशास्त्र, कृषि सांख्यिकी, कटाई उपरांत प्रबंधन, सब्जी विज्ञान, फल विज्ञान, कीट विज्ञान, पादप रोग विज्ञान और पुष्प विज्ञान एवं भूदृश्य निर्माण सहित विभिन्न विषयों के शोधार्थी भाग ले रहे हैं।
बिहार कृषि महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रुबी रानी ने कहा कि शोध को सरल, सटीक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करना आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस मंच का बेहतर उपयोग करने और अपनी प्रस्तुति कौशल को मजबूत बनाने का आह्वान किया।
निदेशक अनुसंधान शिक्षा-सह-अधिष्ठाता (स्नातकोत्तर अध्ययन) डॉ. संजय कुमार ने आईक्यूएसी की इस पहल की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को अपने शोध निष्कर्ष स्पष्टता, आत्मविश्वास और वैज्ञानिक सत्यनिष्ठा के साथ प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया।
वहीं, निदेशक अनुसंधान डॉ. ए.के. सिंह ने कहा कि शोध के परिणामों का लाभ किसानों और समाज तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों से अपनी प्रस्तुतियों में नवाचार, प्रासंगिकता और सामाजिक उपयोगिता पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा कि युवा शोधार्थियों में वैज्ञानिक संचार कौशल विकसित करने के लिए यह पहल बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रतिभागियों से शोध में उत्कृष्टता, वैज्ञानिक नैतिकता और सत्यनिष्ठा बनाए रखते हुए सतत कृषि विकास के लिए उपयोगी समाधान विकसित करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि किसी भी शोध की वास्तविक उपयोगिता तभी साबित होती है, जब उसके निष्कर्षों को सरल और प्रभावी भाषा में संबंधित हितधारकों तक पहुंचाया जा सके।
उद्घाटन सत्र के बाद एमएससी विद्यार्थियों के लिए तकनीकी सत्र आयोजित किया गया, जिसके साथ प्रतियोगिता के तहत शोध प्रस्तुतियों की औपचारिक शुरुआत हुई। प्रतियोगिता का समापन और पुरस्कार वितरण समारोह 10 जुलाई को आयोजित किया जाएगा।
–आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
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