Bengaluru में डेटा सेंटर पार्क की मांग पर Priyank Kharge ने सब्सिडी पर उठाए सवाल

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बेंगलुरु, 11 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी के विधायक और भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष धीरज मुनिराजू ने बुधवार को कांग्रेस के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार से बेंगलुरु और उसके बाहरी इलाकों में समर्पित डेटा सेंटर पार्क स्थापित करने का आग्रह किया। भाजपा विधायक मुनिराजू ने रिपोर्टों का हवाला दिया कि एक गूगल डेटा सेंटर परियोजना बेंगलुरु के बजाय आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में चली गई है। इस सवाल का जवाब देते हुए कर्नाटक के आईटी व बायोटेक्नोलॉजी मंत्री प्रियंक खड़गे ने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार ने इस परियोजना के लिए पर्याप्त सब्सिडी की पेशकश की थी लेकिन कर्नाटक…

बेंगलुरु, 11 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी के विधायक और भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष धीरज मुनिराजू ने बुधवार को कांग्रेस के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार से बेंगलुरु और उसके बाहरी इलाकों में समर्पित डेटा सेंटर पार्क स्थापित करने का आग्रह किया।

भाजपा विधायक मुनिराजू ने रिपोर्टों का हवाला दिया कि एक गूगल डेटा सेंटर परियोजना बेंगलुरु के बजाय आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में चली गई है।

इस सवाल का जवाब देते हुए कर्नाटक के आईटी व बायोटेक्नोलॉजी मंत्री प्रियंक खड़गे ने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार ने इस परियोजना के लिए पर्याप्त सब्सिडी की पेशकश की थी लेकिन कर्नाटक एक अधिक टिकाऊ दृष्टिकोण अपनाएगा। डेटा सेंटर महत्वपूर्ण हैं लेकिन इसे करने के बेहतर तरीके हैं।

विधानसभा में प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए मुनिराजु ने कहा कि बेंगलुरु जिसे आईटी राजधानी के रूप में जाना जाता है, में कोलोकेशन और एंटरप्राइज डेटा सेंटर्स के लिए समर्पित पार्क नहीं हैं।

उन्होंने कहा, “बेंगलुरु को दुनिया की आईटी राजधानी के रूप में जाना जाता है। आईटी बूम शहर के उत्तरी भाग में स्थानांतरित हो रहा है। हालांकि, डेटा सेंटर के मामले में ऐसा नहीं कहा जा सकता। सरकार ने समर्पित डेटा सेंटर पार्क आवंटित नहीं किए हैं। इसके कारण, कंपनियां निजी खिलाड़ियों पर निर्भर होने के लिए मजबूर हैं और उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।”

मुनिराजु ने संकेत दिया कि बड़ी कंपनियां अन्य शहरों की ओर जा रही हैं। “डेटा सेंटर्स की सबसे बड़ी संख्या मुंबई में है जबकि चेन्नई दूसरे स्थान पर है और दिल्ली चौथे स्थान पर है। बेंगलुरु पांचवें स्थान पर चला गया है। चाहे वह सोशल मीडिया हो, स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म, एआई सिस्टम या क्लाउड कंप्यूटिंग, बेंगलुरु इन सभी क्षेत्रों में नंबर एक है। इसके लिए बड़े डेटा सेंटर की आवश्यकता है।”

उन्होंने बेंगलुरु के उत्तर में डोड्डाबल्लापुर में एक प्रमुख डेटा सेंटर पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, जहां क्विन सिटी परियोजना के लिए बड़े भूखंड पहले ही अधिग्रहित किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा, “अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, ऑरैकल और अलीबाबा जैसी प्रमुख कंपनियों का मुख्यालय बेंगलुरु में है। उनके डेटा सेंटर भी यहां होने चाहिए। इसलिए, डोड्डाबल्लापुर में एक डेटा सेंटर पार्क आवंटित किया जाना चाहिए।”

मुनिराजु ने अन्य शहरों में हो रहे विकास की ओर भी इशारा करते हुए कहा, “हैदराबाद बेंगलुरु के समान है और वहां कई डेटा सेंटर स्थापित किए गए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गूगल की डेटा सेंटर परियोजना विशाखापत्तनम चली गई है। तीन अमेज़न परियोजनाओं में 13 बिलियन डॉलर का निवेश हैदराबाद चला गया है। इसलिए, डोड्डाबल्लापुर में डेटा सेंटर को शामिल करने के प्रयास किए जाने चाहिए।”

इस चिंता का जवाब देते हुए प्रियांक खड़गे ने कहा कि विशाखापत्तनम में परियोजना को प्रमुख प्रोत्साहनों से समर्थन मिला है। हर कोई गूगल के विशाखापत्तनम जाने की बात करता है लेकिन कोई नहीं कहता कि यह वहां कितनी लागत पर गया। आंध्र प्रदेश सरकार ने गूगल परियोजना के लिए 22,000 करोड़ की सब्सिडी दी है। भूमि सब्सिडी 25 प्रतिशत है।

खड़गे ने कहा, उन्होंने 15 वर्षों के लिए प्रति यूनिट बिजली शुल्क में 1 रुपये की छूट, 10 वर्षों के लिए 10 प्रतिशत जीएसटी छूट, स्टाम्प ड्यूटी पर 100 प्रतिशत छूट और संयंत्र व मशीनरी पर 10 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी की पेशकश की है। इसके बावजूद, रोजगार के अवसर केवल लगभग 1,500 हैं।

उन्होंने डेटा सेंटर्स की भारी संसाधन आवश्यकताओं को उजागर करते हुए कहा, “डेटा सेंटर अत्यंत बिजली संवेदनशील होते हैं। एक मेगावाट प्लांट के लिए हमें लगभग 70 करोड़ रुपए की आवश्यकता होती है। एक एकड़ जमीन पर केवल एक मेगावाट प्लांट स्थापित किया जा सकता है। एक डेटा सेंटर चलाने के लिए हमें हर साल प्रति मेगावाट लगभग 2.5 करोड़ लीटर पानी की आवश्यकता होती है।”

उन्होंने कहा, “अगर कोई चैटजीपीटी पर पांच प्रश्न पूछता है, तो 500 मिलीलीटर पानी खर्च होता है। यही खपत का पैमाना है। अब, नई तकनीक के साथ, कंपनियां लिक्विड कूलिंग और ट्रीटेड वाटर का उपयोग कर रही हैं। यही कारण है कि हम अपनी नीति पर फिर से विचार करेंगे और टिकाऊ डेटा सेंटर नीति तैयार करेंगे।”

मंत्री के अनुसार, कर्नाटक में वर्तमान में 32 डेटा सेंटर निजी तौर पर संचालित हो रहे हैं। हमारे पास पहले से ही डेटा सेंटर नीति है और हम इसे समीक्षा कर रहे हैं। एआई, मशीन लर्निंग और अन्य उभरती तकनीकों के लिए डेटा सेंटर होना आवश्यक है। लेकिन डेटा सेंटर पानी और ऊर्जा के बड़े उपभोक्ता भी हैं। इस पृष्ठभूमि में, हमारी सरकार यह जांच रही है कि क्या टिकाऊ डेटा सेंटर को बढ़ावा दिया जा सकता है।

उन्होंने कहा, “मौजूदा नीति तीन साल पुरानी है, हम नई नीति को अधिक टिकाऊ बनाने की योजना बना रहे हैं। बेंगलुरु के अलावा, हमारा ध्यान मंगलुरु और तटीय क्षेत्रों पर भी है। हम निजी कंपनियों के साथ चर्चा में हैं। भूमि की कमी नहीं है और नीति के तहत हम यथासंभव अधिक डेटा सेंटर लाने पर ध्यान देंगे। हमारा ध्यान बेंगलुरु के बाहर विकास पर भी है।”

उन्होंने कहा कि हाइपरस्केल डेटा सेंटर संसाधन सीमाओं के कारण बेंगलुरु के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते। बेंगलुरु के लिए जो उपयुक्त होगा वह हाइपरस्केल डेटा सेंटर नहीं है क्योंकि हमारे पास पोर्ट नहीं है और पानी की भी कमी है। हमारा ध्यान छोटे, मध्यम और बड़े डेटा सेंटर पर है, लेकिन हाइपरस्केल डेटा सेंटर पर नहीं।

–आईएएनएस

एमकेए/एसएनजे/एसकेपी

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