भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा है कि केंद्र सरकार को अपना ‘अड़ियल रवैया’ त्याग देना चाहिए और वार्ता के माध्यम से किसानों के मुद्दों का समाधान करना चाहिए। मुजफ्फरनगर के समीप सिसोली में बीकेयू मुख्यालय में रविवार शाम को उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि किसानों को पता है कि ‘बड़े औद्योगिक घरानों को फायदा‘ पहुंचाने के लिए ही केंद्र द्वारा ये तीनों कानून लाये गये हैं और ये ‘कृषकों के विरूद्ध हैं।’
उन्होंने केंद्र सरकार पर किसानों के लंबे समय से सड़क पर प्रदर्शन करने के दौरान अड़ियल रवैया अपनाये रखने का आरोप लगाया। हजारों किसान नये तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग करते हुए ठंड और वर्षा में पिछले एक महीने से दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं। उनमें यादातर पंजाब, हरियाणा एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान हैं।
सितंबर 2020 में बनाये गये इन कानूनों को सरकार ने बड़े सुधार के रूप में पेश किया है और कहा कि उनका लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना है। प्रदर्शनकारी किसानों ने चिंता जतायी है कि ये कानून न्यूनतम समर्थन मूल्य एवं मंडली प्रणालियों को कमजोर करेंगे और उन्हें औद्योगिक घरानों के रहमो-करम पर छोड़ देंगे।


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