CBI की बड़ी कार्रवाई, हजारों करोड़ के क्रिप्टो घोटाले का मुख्य आरोपी गिरफ्तार

Summary :

नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने डार्विन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक और सीटीओ आयुष वार्ष्णेय को गेनबिटकॉइन क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है। यह मामला वेरिएबलटेक प्राइवेट लिमिटेड द्वारा शुरू की गई कथित गेनबिटकॉइन पोंजी स्कीम से संबंधित है, जिसमें निवेशकों को मोटा मुनाफा का वादा करके धोखाधड़ी वाली क्रिप्टोकरेंसी योजना में निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया था। निवेशकों से लिए गए पैसे का बाद में दुरुपयोग किया गया। इस मामले की जांच भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 406, 420…

नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने डार्विन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक और सीटीओ आयुष वार्ष्णेय को गेनबिटकॉइन क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है।

यह मामला वेरिएबलटेक प्राइवेट लिमिटेड द्वारा शुरू की गई कथित गेनबिटकॉइन पोंजी स्कीम से संबंधित है, जिसमें निवेशकों को मोटा मुनाफा का वादा करके धोखाधड़ी वाली क्रिप्टोकरेंसी योजना में निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया था। निवेशकों से लिए गए पैसे का बाद में दुरुपयोग किया गया।

इस मामले की जांच भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 406, 420 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66 के तहत की जा रही है। 13 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने गेनबिटकॉइन धोखाधड़ी से संबंधित इसी तरह के आरोपों के बारे में दर्ज एफआईआर की जांच सीबीआई को एक सामान्य जांच एजेंसी के रूप में करने का निर्देश दिया था।

जांच के दौरान एमसीएपी नामक क्रिप्टो टोकन और संबंधित ईआरसी-20 स्मार्ट कॉन्ट्रेक्ट के डिज़ाइन, विकास और तैनाती में डार्विन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड और इसके सह-संस्थापकों जिनमें आरोपी आयुष वार्ष्णेय, साहिल बागला और निकुंज जैन शामिल हैं, की भूमिका सामने आई। डार्विन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड ने धोखाधड़ी वाली योजना के संपूर्ण तकनीकी ढांचे को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसमें बिटकॉइन माइनिंग पूल प्लेटफॉर्म, बिटकॉइन पेमेंट गेटवे, कॉइन बैंक बिटकॉइन वॉलेट और गेन बिटकॉइन निवेशक वेबसाइट शामिल हैं।

आरोपी के फरार होने के कारण लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। 9 मार्च को भारत छोड़ने का प्रयास करते समय मुंबई में इमिग्रेशन अधिकारियों ने आयुष वार्ष्णेय को रोक लिया और बाद में सीबीआई को सौंप दिया। इसके बाद काूननी प्रक्रिया के तहत सीबीआई ने आयुष को गिरफ्तार कर लिया।

–आईएएनएस

ओपी/पीएम

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk

News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.