LS Speaker Om Birla : संसद में बजट सत्र के दूसरे चरण की कार्यवाही के दौरान बुधवार को लोकसभा में जबरदस्त हंगामा होने के पूरे आसार हैं। सदन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा जारी है। आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चर्चा में हिस्सा लेंगे।
इससे पहले मंगलवार को दोनों ओर से आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी रहा। विपक्ष ने जहां ओम बिरला पर सरकार की आवाज बनने जैसे गंभीर आरोप लगा दिए, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने कहा है कि ओम बिरला ने कभी पक्षपातपूर्ण व्यवहार नहीं किया। हंगामे के बाद दोनों सदनों की कार्रवाई बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई थी।
10 घंटे का समय तय
बता दें, संसद के बजट सत्र के दूसरे फेज का बुधवार को तीसरा दिन है। लोकसभा में आज भी स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा जारी रहेगी। इस चर्चा के लिए कुल 10 घंटे का समय तय किया गया है, जिसमें मंगलवार को करीब 7 घंटे तक बहस हो चुकी है।
विपक्ष का आरोप
मंगलवार को सत्र के दूसरे दिन विपक्षी सांसदों ने ओम बिरला पर सदन की कार्यवाही में पक्षपात का आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। 50 से अधिक सांसदों के समर्थन के बाद पीठासीन अधिकारी ने प्रस्ताव को सदन में पेश करने और चर्चा की मंजूरी दी।
‘दबाव में काम कर रहे स्पीकर’
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि बजट सत्र के दौरान 20 बार नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को रोका-टोका गया। उन्हें बार-बार नियमावली (रूलिंग बुक) दिखाई गई। विपक्ष ने कहा कि स्पीकर सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं।
सत्ता पक्ष का जवाब
संसदीय कार्यमंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि ओम बिरला पर लगे आरोप झूठे हैं। उन्होंने कहा कि स्पीकर निष्पक्षता से सदन की कार्यवाही संचालित करते हैं। उन्होंने बताया कि 15वीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष केवल दो बार बोले और जब सेशन चलता है तो विदेश चले जाते हैं। नेता प्रतिपक्ष अपनी बात कह कर सदन से चले जाते हैं और फिर आरोप लगाते हैं कि उन्हें बोलने नहीं दिया गया।
ओम बिरला को पद से हटाने पर तुला विपक्ष, चाहिए होंगे कितने वोट?
बता दें कि ओम बिरला के खिलाफ यह अविश्वास प्रस्ताव बीते फरवरी माह में ही लाया गया था जिस पर लगभग 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे। इस प्रस्ताव पर बहस के लिए 10 घंटे का समय तय किया गया है, जिसके बाद इस पर सांसदों के मत लिए जाएंगे। प्रस्ताव पास कराने के लिए विपक्ष को सिंपल मेजोरिटी यानि साधारण बहुमत की आवश्यकता है।
यह बहुमत मिलना विपक्ष के लिए मुश्किल है, यदि यह बहुमत मिल जाता है तो इसे सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव कर रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि ऐसा होना बेहद मुश्किल है।
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