देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं, भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर : केंद्र

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नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि देश में पेट्रोल और डीजल की किसी तरह की कोई कमी नहीं है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त से भी ज्यादा आपूर्ति मौजूद है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ जगहों पर जो स्थानीय स्तर पर दबाव या कमी जैसी स्थिति दिखाई दे रही है, उसकी वजह वास्तविक सप्लाई संकट नहीं बल्कि ईंधन की गलत दिशा में खरीद और जमाखोरी है। सरकार के मुताबिक, भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनिंग देश है। देश में इस समय 22 रिफाइनरियां संचालित…

नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि देश में पेट्रोल और डीजल की किसी तरह की कोई कमी नहीं है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त से भी ज्यादा आपूर्ति मौजूद है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ जगहों पर जो स्थानीय स्तर पर दबाव या कमी जैसी स्थिति दिखाई दे रही है, उसकी वजह वास्तविक सप्लाई संकट नहीं बल्कि ईंधन की गलत दिशा में खरीद और जमाखोरी है।

सरकार के मुताबिक, भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनिंग देश है। देश में इस समय 22 रिफाइनरियां संचालित हो रही हैं, जिनकी कुल क्षमता 258.1 मिलियन टन प्रतिवर्ष है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की घरेलू खपत 243.2 मिलियन टन रही, जबकि इसी दौरान 61.5 मिलियन टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी किया गया। इससे साफ है कि भारत न सिर्फ अपनी जरूरत पूरी कर रहा है, बल्कि दुनिया के बड़े निर्यातकों में भी शामिल है।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी लगातार सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (पीएसयू ओएमसी), राज्य सरकारों और उद्योग संगठनों के संपर्क में हैं ताकि पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे। सरकार ने बताया कि पेट्रोलियम सचिव ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, एफआईसीसीआई और सीआईआई के साथ भी स्थिति की समीक्षा की।

सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बावजूद आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा बोझ खुदरा उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है। पीएसयू ओएमसी फिलहाल पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर लगभग 550 करोड़ रुपए प्रतिदिन का नुकसान उठा रही हैं। यह राहत खास तौर पर आम परिवारों, किसानों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए दी जा रही है।

हालांकि सरकार ने चिंता जताई है कि कुछ औद्योगिक उपभोक्ता औद्योगिक चैनल के बजाय खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद रहे हैं ताकि कम कीमत का फायदा उठा सकें। इससे आम उपभोक्ताओं के लिए बने खुदरा नेटवर्क पर दबाव बढ़ रहा है और कुछ इलाकों में कृत्रिम कमी जैसी स्थिति बन रही है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, निजी तेल कंपनियों की हाई स्पीड डीजल (एचएसडी) बिक्री में इस महीने करीब 38 प्रतिशत की गिरावट आई है, क्योंकि उनके दाम ज्यादा हैं। यह मांग अब पूरी तरह पीएसयू रिटेल आउटलेट्स की तरफ शिफ्ट हो रही है। वहीं पीएसयू के बल्क ग्राहकों की बिक्री में भी करीब 29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो रिटेल पंपों की ओर बढ़ रही है।

सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से विशेष टीमें बनाने और जमाखोरी, कालाबाजारी, अनधिकृत भंडारण तथा रिटेल सप्लाई के दुरुपयोग के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही उद्योग संगठनों से भी अपने सदस्यों को नियमों और उसके उल्लंघन के परिणामों के बारे में जागरूक करने को कहा गया है।

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।

–आईएएनएस

वीकेयू/एबीएम

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