संसद नहीं चलने देना विपक्ष की साजिश, सरकार हर मुद्दे पर बहस के लिए तैयार : भाजपा

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नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध लगातार गहराता जा रहा है। भाजपा सांसदों ने गुरुवार को विपक्ष के आचरण को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष जानबूझकर सदन को चलने नहीं दे रहा। भाजपा सांसद नरेश बंसल ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि संसद चले। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों की जिम्मेदारी है कि संसद चले।…

नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध लगातार गहराता जा रहा है। भाजपा सांसदों ने गुरुवार को विपक्ष के आचरण को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष जानबूझकर सदन को चलने नहीं दे रहा।

भाजपा सांसद नरेश बंसल ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि संसद चले। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों की जिम्मेदारी है कि संसद चले। लेकिन, विपक्ष सदन को नहीं चलने देने पर अड़ा हुआ है। विपक्ष चर्चा से बच रहा है, जबकि सरकार हर मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है।”

संसद के बाहर और भीतर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने विपक्ष पर सोची-समझी साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “यह कोई गतिरोध नहीं है। यह कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की एक सोची-समझी साजिश है ताकि संसद को काम करने से रोका जा सके। विपक्ष के कई नेता संसद के बाहर और अंदर भी हंगामा करते हैं, जिसकी वजह से जिन अहम बिलों पर चर्चा होनी चाहिए, उन पर बहस नहीं हो पा रही है। पूरा देश यह सब देख रहा है। सही समय आने पर इन सभी राजनीतिक दलों को माकूल जवाब दिया जाएगा।”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति को लेकर विपक्ष के सवालों पर भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी और उसके नेता राहुल गांधी और खड़गे रोज नई-नई कहानियां गढ़ते हैं और नए पोस्टर लेकर आते हैं। अमित शाह को बुलाओ, अमित शाह को बुलाओ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रोज सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक अपने चैंबर में रहते हैं। पहले सदन को चलने दें, सदन में बहस होने दें। जब सदन में बहस होगी, तो वे बोलेंगे और कड़ा जवाब देंगे।”

रविशंकर प्रसाद ने झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी उम्मीदवारों के विरोध प्रदर्शन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने झारखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “वहां जो बात सामने आ रही है, उससे साफ पता चलता है कि झारखंड सरकार ने सारा काम एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी को सौंप दिया है। जिस कंपनी को योगी सरकार ने ब्लैकलिस्ट किया था, उसे राजस्थान में भी ब्लैकलिस्ट किया गया था, फिर भी उसे कई परीक्षाओं का काम सौंपा गया है। इसका क्या मतलब है? मैं फिर कहूंगा, अगर वहां नौकरियां बेची जा रही हैं, तो राहुल गांधी चुप क्यों हैं? वह इलाहाबाद और दूसरी जगहों पर क्यों जा रहे हैं, युवाओं से बातचीत करने के लिए? वह उस सरकार पर चुप क्यों हैं, जो उन्हीं के समर्थन से चल रही है? राहुल गांधी पाखंडी हैं। उनके दो चेहरे हैं, एक चेहरा यहां दिखता है और दूसरी जगह वह चुप रहते हैं। देश यह सब देख रहा है।”

संसदीय समितियों के कामकाज पर भाजपा सांसद बैजयंत पांडा ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संसद के दोनों सदनों में पब्लिक अंडरटेकिंग्स कमेटी यानी सीओपीयू की छह रिपोर्ट पेश की गईं। सबसे पहले, मैं सीओपीयू कमेटी के सभी सम्मानित सदस्यों को उनकी कड़ी मेहनत और लगन के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। पिछले दो सालों में कमेटी की प्रोडक्टिविटी चार गुना बढ़ गई है। पिछले दो सालों में 30 रिपोर्ट पेश की गई हैं और लगातार कई विषयों पर काम हो रहे हैं।

कांवड़ यात्रा को लेकर मौलाना साजिद रशीदी के बयान पर भी भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने कहा, “लोग दुनिया को उसी नजरिए से देखते हैं, जिसे वे चुनते हैं। जो लोग राम भक्तों और शिव भक्तों को आतंकवादी मानते हैं, वे अपनी ही सोच जाहिर कर रहे हैं।”

भाजपा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने कहा कि कांवड़ ले जाना गहरी आस्था का विषय है। जो कोई भी उस आस्था पर हमला करेगा, उसे समाज बर्दाश्त नहीं करेगा। जो लोग कांवड़ यात्रा के बारे में आपत्तिजनक बयान देते हैं, वे लोगों की धार्मिक मान्यताओं पर हमले कर रहे हैं। सनातनी और हिंदू समाज अपनी आस्था पर ऐसा कोई भी हमला बर्दाश्त नहीं करेगा। जब भी सरकार कोई कानून लाती है या नियम बनाती है, तो उसका मकसद बड़ा राष्ट्रीय हित होता है। हर कानून इस बात को ध्यान में रखकर बनाया जाता है कि उससे देश को क्या फायदा होगा। कोई भी कानून किसी व्यक्ति के फायदे के लिए नहीं बनाया जाता।

–आईएएनएस

एससीएच/एबीएम

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