फाइमा सर्वे का खुलासा, 87% रेजिडेंट डॉक्टर बर्नआउट के शिकार, आधे से अधिक छोड़ना चाहते हैं रेजिडेंसी

Summary :

FAIMA : देशभर के रेजिडेंट डॉक्टरों की कार्य परिस्थितियों को लेकर फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फाइमा) ने रिव्यू मेडिकल सिस्टम (आरएमएस) 2.0 सर्वे जारी किया। इस सर्वे ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सर्वे के अनुसार, रेजिडेंट डॉक्टर बर्नआउट का सामना कर रहे हैं। बड़ी संख्या में संस्थागत सहयोग के अभाव की बात कही गई है। इसमें अत्यधिक कार्यभार, लंबी ड्यूटी, नींद की कमी, मानसिक तनाव शामिल है। फाइमा ने इन हालात में तत्काल नीतिगत सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया है। इससे पहले फाइमा ने आरएमएस 1.0 सर्वे के माध्यम से मेडिकल शिक्षा व्यवस्था की कई कमियों…

FAIMA : देशभर के रेजिडेंट डॉक्टरों की कार्य परिस्थितियों को लेकर फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फाइमा) ने रिव्यू मेडिकल सिस्टम (आरएमएस) 2.0 सर्वे जारी किया। इस सर्वे ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सर्वे के अनुसार, रेजिडेंट डॉक्टर बर्नआउट का सामना कर रहे हैं। बड़ी संख्या में संस्थागत सहयोग के अभाव की बात कही गई है। इसमें अत्यधिक कार्यभार, लंबी ड्यूटी, नींद की कमी, मानसिक तनाव शामिल है।

फाइमा ने इन हालात में तत्काल नीतिगत सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया है। इससे पहले फाइमा ने आरएमएस 1.0 सर्वे के माध्यम से मेडिकल शिक्षा व्यवस्था की कई कमियों की ओर ध्यान आकर्षित किया था। उस सर्वे में अनियमित ड्यूटी घंटे, अपर्याप्त बुनियादी ढांचा, फैकल्टी की कमी, कमजोर मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली तथा मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव जैसे मुद्दे सामने आए थे।

इन निष्कर्षों के आधार पर फाइमा ने राष्ट्रीय टास्क फोर्स (एनटीएफ) की सिफारिशों को लागू करने और मेडिकल संस्थानों में व्यापक सुधार की मांग उठाई थी। इन्हीं चिंताओं को ध्यान में रखते हुए आरएमएस 2.0 को विशेष रूप से रेजिडेंट डॉक्टरों पर केंद्रित देशव्यापी सर्वे के रूप में शुरू किया गया। इसका उद्देश्य ड्यूटी के घंटे, कार्यभार, बर्नआउट, नींद की कमी, बॉन्ड नीति से जुड़ा तनाव, स्टाइपेंड को लेकर असंतोष और संस्थागत सहायता प्रणाली का वास्तविक आकलन करना था, ताकि साक्ष्यों के आधार पर नीति निर्माण को मजबूती मिल सके।

1,260 रेजिडेंट डॉक्टरों ने इस गुमनाम ऑनलाइन सर्वे में चौंकाने वाले तथ्य

देश के 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,260 रेजिडेंट डॉक्टरों ने इस गुमनाम ऑनलाइन सर्वे में भाग लिया। सर्वे के नतीजे बेहद चिंताजनक रहे। लगभग 87.5 प्रतिशत प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि उन्हें अक्सर या कभी-कभी बर्नआउट के लक्षण महसूस होते हैं।

वहीं 87.8 प्रतिशत डॉक्टरों ने बताया कि लंबी ड्यूटी के कारण उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती। सर्वे में शामिल 61.8 प्रतिशत डॉक्टरों ने लगातार 36 घंटे से अधिक समय तक ड्यूटी करने की बात कही। सबसे चिंताजनक तथ्य यह रहा कि 54.4 प्रतिशत रेजिडेंट डॉक्टरों ने अत्यधिक तनाव और कार्यभार के कारण रेजिडेंसी छोड़ने तक का विचार किया, जबकि 16.9 प्रतिशत प्रतिभागियों ने काम के दबाव के चलते स्वयं को नुकसान पहुंचाने जैसे विचार आने की बात स्वीकार की।

बॉन्ड नीति की समीक्षा करने की दिशा में तत्काल प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता

फाइमा का कहना है कि सर्वे के निष्कर्ष स्पष्ट संकेत देते हैं कि रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए ड्यूटी के घंटे तय करने, पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराने, मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली को मजबूत करने, स्टाइपेंड में सुधार करने तथा बॉन्ड नीति की समीक्षा करने की दिशा में तत्काल प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। संगठन का मानना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए तो इसका सीधा असर देश की स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।

यह भी पढ़ें : नाबालिग लड़कियों और महिलाओं का पीछा कर बनाता था वीडियो, सोशल मीडिया स्टार बनने की चाह ने पहुंचाया हवालात

Avinay