नागपुर, 13 अगस्त (आईएएनएस)। एनसीसीआई ने एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजने का स्वागत किया। नेशनल काउंसिल ऑफ चर्च्स इन इंडिया (एनसीसीआई) के महासचिव असिर एबेनेजर ने गुरुवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत की।
असिर एबेनेजर ने कहा कि चर्च और मिशनरियों जुड़े संगठन गैर-सरकारी होते हैं। जिनकी बुनियाद आस्था होती है। यह संगठन निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में सरकार की मदद करते हैं। हमारे संगठन मुख्य रूप से स्वास्थ्य, शिक्षा, निर्धारित उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। वहीं, जब कभी हमें विदेशों से अनुदान प्राप्त होते हैं तो हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हम ट्रस्ट अनुदान से संबंधित शर्तों को पूरा करने की दिशा में प्रतिबद्ध रहे। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हम सभी निर्धारित नियमों का पालन करने के प्रति गंभीर रहे और उस दिशा में किसी भी प्रकार की कोताही न बरते।
उन्होंने कहा कि अब जिस तरह से एफसीआरए में संशोधन किए गए हैं, उससे यह साफ जाहिर होता है कि हमारी संस्थाओं को दंडित करने की कोशिश की जा रही है। इतना ही नहीं, जिस तरह से संशोधन किया गया है, उससे यह साफ जाहिर हो रहा है कि इस पूरे परिवर्तन को महज हफ्ते में ही क्रियान्वित करने की कोशिश की जा रही है। अब इस एफसीआरए संशोधन विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि अगर निर्धारित नियमों में किसी भी प्रकार का उल्लंघन किया जाता है तो उस संस्था का रजिस्ट्रेशन बंद किया जा सकेगा। इस पूरे मामले में अपील की भी कोई सुविधा नहीं दी गई है और न ही किसी भी प्रकार की न्यायिक समीक्षा के विकल्प खुले हैं। इसी को लेकर हमारी आपत्ति है। लाइसेंस को रद्द करने से पहले मेरे लिए ऐसा कोई मंच नहीं है, जहां मैं अपनी नुमाइंदगी कर सकूं।
उन्होंने आगे कहा कि हमारी दूसरी समस्या यह है कि अगर मान लीजिए मेरे या मेरी संस्था के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई की जाती है, तो ऐसी स्थिति में सारी संपत्ति अपने आप विजिटिंग अथॉरिटी के पास चले जाते हैं और विजिटिंग अथॉरिटी के पास उन संपत्तियों को बेचने का पूरा अधिकार होगा। इस अथॉरिटी के पास कई तरह के अधिकार होंगे, जैसे ये संपत्ति को बेच सकते हैं या उसे सरकार को सौंप सकते हैं। हम इसी प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। हमारा सवाल है कि जो पैसा कम्युनिटी को प्राप्त हो रहा है, आखिर वो किसी थर्ड पार्टी को कैसे जा सकता है। यह पैसा या तो कम्युनिटी को जाना चाहिए या दान देने वाले व्यक्ति को मिलना चाहिए या यह पैसा संगठन में ही रहना चाहिए। अगर लाइसेंस रद्द किया जाता है, तो कार्रवाई की सीमा वही तक सीमित रहे, तो ज्यादा बेहतर रहेगा।
उन्होंने कहा कि 2010 एफसीआरए को संशोधन करने की कोशिश की जा रही है। 2010 एफसीआरए में डिस्क्वालिफिकेशन की सुविधा प्रदान की गई है। अगर ट्रस्टी के ऊपर किसी भी स्थिति में एफआईआर दर्ज की जाती है। इस देश में ऐसा कोई कानून नहीं है, जिसमें एफआईआर की वजह से डिस्क्वालिफाई कर दिया जाता हो। ऐसी स्थिति में हम इस कदम का स्वागत करते हैं कि एफसीआरए के इस संशोधन विधेयक को जेसीपी को भेज दिया गया है, जहां पर इससे जुड़े हर बिंदुओं की समीक्षा की जाएगी।
असिर एबेनेजर ने कहा कि सरकार के पास पूरा अधिकार है कि वह कानून के तहत इस बात की पूरी पड़ताल करे कि कहीं कोई उपद्रव न हो। अगर यह सबकुछ किसी विदेशी अनुदान का सहारा लेकर किया जा रहा है तो निश्चित तौर पर इसकी जांच होनी चाहिए। सवाल यह है कि आप यह सबकुछ करने के लिए किस तरह की प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं, यह अपने आप में बड़ा सवाल है। अगर कोई इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त है तो उसे चिन्हित करते हुए उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इसकी वजह से आप सभी को निशाना बनाने की कोशिश मत कीजिए। इस तरह की गतिविधियों में हो सकता है कि कोई 1 या 10 या 20 फीसदी लोग शामिल हो। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसकी आड़ में सभी लोगों को निशाना नहीं बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मैं इस पूरी स्थिति को ऐसे नहीं देखता हूं कि सरकार इस कदम से किसी अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े लोगों या एनजीओ को दबाने की कोशिश कर रही है। हम सरकार के साथ मिलकर कुछ काम कर रहे हैं। हालांकि, कुछ ऐसे संशोधन हैं, जिन्हें हम प्रासंगिक समझते हैं। हम यही चाहते हैं कि रेगुलेशन पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी होना चाहिए। हम किसी को भी बाध्य नहीं कर सकते हैं। आजाद देश में सभी को अपने तरीके से जीने का और अपना काम करने का पूरा अधिकार है।
उन्होंने कहा कि अब इस संशोधन विधेयक को जेसीपी को समीक्षा के लिए भेज दिया गया है, तो मैं चाहूंगा कि 2010 एक्ट की विधिवत रूप से समीक्षा की जाए। इस दिशा में कोई कोताही नहीं बरती जाए। हमारे लिए रेगुलेशन बहुत जरूरी हो जाता है। इस दिशा में कोई उल्लंघन नहीं होना चाहिए। मैं समझता पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और स्वतंत्र होनी चाहिए। अगर कोई इन नियमों का उल्लंघन करता है तो सिर्फ उसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इस वजह से सिर्फ सभी एनजीओ और आस्था के आधार पर चल रहे सभी संगठनों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
–आईएएनएस
एसएचके/डीकेपी
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