RSS Chief Mohan Bhagwat : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में ‘जेन जी’ (Gen Z) और ‘जेन अल्फा’ (Gen Alpha) के छात्रों से बातचीत करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं और छात्रों द्वारा किए जाने वाले आंदोलन या प्रदर्शन को गलत नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
भागवत के अनुसार, लोकतंत्र में अपनी बात सरकार तक पहुंचाने और आम सहमति बनाने का आंदोलन भी एक प्रभावी जरिया है। जब लोगों की समस्याओं और चिंताओं को अनदेखा किया जाता है, तभी लोग सड़कों पर उतरते हैं। उन्होंने छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों का बचाव करते हुए कहा कि अगर नई पीढ़ी किसी मुद्दे पर अपनी आवाज उठा रही है, तो उन्हें किसी भी सूरत में ‘राष्ट्र-विरोधी’ नहीं माना जा सकता।
‘मौजूदा पीढ़ी से ज्यादा ईमानदार हैं युवा’
आरएसएस प्रमुख ने नई पीढ़ी की तारीफ करते हुए कहा कि देशभक्ति और समाज सेवा के विचार युवाओं को गहराई से प्रभावित करते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर उन्हें आंख बंद करके किसी पर भरोसा करना हो, तो वे ‘जेन जी’ पर करेंगे। उनके मुताबिक, आज के युवा पुरानी पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार और स्पष्टवादी हैं।
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और संवाद जरूरी
मोहन भागवत ने माना कि युवाओं की शिकायतें और मांगें काफी हद तक जायज हैं, खासकर देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर। उन्होंने कहा कि भारत के मौजूदा एजुकेशन सिस्टम में सुधार की भारी जरूरत है और इसके लिए सरकार व छात्रों के बीच निरंतर बातचीत होनी चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने देश के शिक्षा बजट को बढ़ाकर 6 प्रतिशत किए जाने की बात भी रखी। उनका मानना है कि स्वस्थ चर्चा से ही किसी भी समस्या का समाधान निकल सकता है।
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