जेनजी से संवाद जरूरी, कृषि में रोजगार और बिजनेस के लिए युवाओं को मिले सही दिशा : बीएयू के वाइस-चांसलर

Summary :

भागलपुर, 5 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (बीएयू) के वाइस-चांसलर डॉ. डी.आर. सिंह ने बुधवार को कहा कि जेनजी के साथ लगातार संवाद जरूरी है। इससे युवाओं को सही दिशा मिलेगी और खासकर कृषि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। डॉ. डी.आर. सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “बच्चों से संवाद बहुत जरूरी है। बच्चों से संवाद से हम उनकी सोच को समझेंगे और उसी के साथ आगे बढ़ेंगे। इसमें सभी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। सिर्फ शैक्षणिक संस्थान ही नहीं, बल्कि उनके अभिभावक को भी संवाद करना चाहिए। जेनजी को भी सोचना…

भागलपुर, 5 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (बीएयू) के वाइस-चांसलर डॉ. डी.आर. सिंह ने बुधवार को कहा कि जेनजी के साथ लगातार संवाद जरूरी है। इससे युवाओं को सही दिशा मिलेगी और खासकर कृषि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

डॉ. डी.आर. सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “बच्चों से संवाद बहुत जरूरी है। बच्चों से संवाद से हम उनकी सोच को समझेंगे और उसी के साथ आगे बढ़ेंगे। इसमें सभी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। सिर्फ शैक्षणिक संस्थान ही नहीं, बल्कि उनके अभिभावक को भी संवाद करना चाहिए। जेनजी को भी सोचना चाहिए।”

उन्होंने बिहार की युवा आबादी का जिक्र करते हुए कहा, “अगर बिहार की बात करें तो यहां की आधी आबादी युवा है। 18 से 21 वर्ष के बीच के युवाओं की संख्या करीब 45 से 50 प्रतिशत है।”

डॉ. सिंह ने कहा, “बिहार के युवाओं को एक धरोहर की तरह देखना चाहिए और उनके लिए ठोस योजना बनानी चाहिए। हर जिले में इस आयु के कितने बच्चे हैं, उनकी क्या क्वालिफिकेशन है, और वे किस लाइन में जाना चाहते हैं, इसका डेटाबेस बनाना बहुत जरूरी है, जिसके हिसाब से हमें एक कार्ययोजना बनानी चाहिए।”

उन्होंने सुझाव दिया कि यह कार्ययोजना युवाओं तक पहुंचाई जाए और उनसे सुझाव भी लिए जाएं। इसे बच्चों के बीच भी लेकर जाएं और बताएं कि आपके लिए हमारी यह कार्ययोजना है और उनका भी सुझाव लें। ऐसे में संवाद होना बहुत जरूरी है।”

कृषि क्षेत्र में संभावनाओं पर बोलते हुए वीसी ने कहा, “बिहार में युवाओं के लिए कृषि में बहुत स्कोप है। खाना सभी को प्रतिदिन चाहिए। बिना खाने के आदमी नहीं रह सकता। पहले हम पेट भरने की बात कर रहे थे, अब पोषण की बात कर रहे हैं। हम आत्मनिर्भर हो गए और अब पोषण सुरक्षा पर काम करना है। सारे वैज्ञानिक इस पर काम कर रहे हैं। पूरे देश और हमारे बिहार में भी अलग-अलग जलवायु परिस्थिति हैं।”

उनके मुताबिक, “युवाओं को रोजगार देने वाला बनाने के लिए गाइडेंस और सरकारी सहयोग दोनों जरूरी हैं। बच्चों को कैसे एक रास्ता दिखाया जाए, उसके लिए संवाद बहुत जरूरी है। बच्चों को कैसे रोजगार देने वाला बनाया जाए, उसके लिए संवाद बहुत जरूरी है। इसमें सरकार का समर्थन जरूरी है। सरकार को युवाओं के लिए जरूरी योजना लानी चाहिए। आज बिजनेस मॉड्यूल बनाने की जरूरत है। सरकार को टैक्स-फ्री लोन की सुविधा देनी चाहिए। हम हर जिले का प्लान बनाकर आगे बढ़ सकते हैं।”

डॉ. सिंह ने कहा कि कृषि अब सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रही। फूड प्रोसेसिंग, एग्री-टेक, न्यूट्रिशन और क्लाइमेट स्मार्ट फार्मिंग जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए बड़े अवसर हैं। अगर सही मार्गदर्शन और वित्तीय मदद मिले तो बिहार के युवा कृषि को नई ऊंचाई दे सकते हैं।

–आईएएनएस

एससीएच/एबीएम

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk

News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.