राज्यसभा में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह को लगातार दूसरी बार सदन का उपाध्यक्ष चुना गया। ध्वनि मत के बाद हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा के उपाध्यक्ष के पद के लिए चुना गया है। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने घोषणा की, “मैं घोषणा करता हूं कि हरिवंश जी को राज्यसभा का उपाध्यक्ष चुना गया है।”
राज्यसभा के उपसभापति पद के चुनाव में हरिवंश नारायण सिंह ने मनोज कुमार झा को हराया। झा को कांग्रेस सहित 12 विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “सदन के प्रत्येक सदस्य ने हरिवंश जी के प्रति जो सम्मान रखा है, वह उनके सम्मान में आया है। संसद में उनकी निष्पक्ष भूमिका हमारे लोकतंत्र को मजबूत करती है।” कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद ने भी नवनिर्वाचित उपसभापति की प्रशंसा की।
हरिवंश नारायण सिंह के निर्वाचित होने के बाद आजाद ने कहा, “यह दूसरी बार है जब उन्हें सदन के उपाध्यक्ष के रूप में चुना गया है। मैं उन्हें बधाई देता हूं। वह सभी दलों के सदस्यों के साथ रहे हैं।” उपसभापति के चुनाव की प्रक्रिया राज्यसभा सांसद द्वारा पद के लिए एक उम्मीदवार के नाम का प्रस्ताव पेश करने के साथ शुरू हुई। एनडीए की तरफ से भाजपा सांसद जगत प्रकाश नड्डा ने उपसभापति पद के लिए सिंह के नाम का प्रस्ताव पेश किया।
हरिवंश नारायण सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिताब दियारा गांव में 30 जून, 1956 में हुआ था। सिंह को राजनीती में आने के लिए जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया से अपने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत की और अपने पूरे करियर में कई अलग-अलग मीडिया प्रकाशनों में काम किया है।
हरिवंश ने पूर्व प्रधान मंत्री चंद्रशेखर के अतिरिक्त मीडिया सलाहकार के रूप में भी कार्य किया है। वे 1989 में हिंदी समाचार पत्र प्रभात खबर से जुड़े। यह समाचार पत्र बिहार के चारा घोटाला सहित कई उच्च प्रोफ़ाइल घोटालों की जांच के लिए जाना जाता है।
वर्ष 2014 में, जनता दल (यूनाइटेड) ने छह साल की अवधि के लिए बिहार से हरिवंश को राज्यसभा के लिए नामित किया।8 अगस्त, 2018 को, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में छह साल के कार्यकाल के लिए उन्हें राज्यसभा के उप सभापति के रूप में निर्वाचित किया गया, उनके पक्ष में कुल 125 मत पड़े तो वहीं बी.के. हरिप्रसाद के पक्ष में कुल 105 मत पड़े। उन्होंने विपक्ष की ओर से कांग्रेस के बी.के. हरिप्रसाद को हराया।


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