एसआईआर पर कांग्रेस का विरोध बेबुनियाद, 12 में से 10 पुनरीक्षण कांग्रेस सरकार में हुए: नित्यानंद राय

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सूरत, 5 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने गुरुवार को कहा कि जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों के दौरान मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) के 12 में से 10 अभ्यास किए गए थे, तब कांग्रेस ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी, लेकिन अब वह उसी प्रक्रिया का विरोध कर रही है। सूरत शहर के भाजपा कार्यालय में पार्टी के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, राय ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे अपनी लगातार चुनावी हार को स्वीकार करने के बजाय,…

सूरत, 5 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने गुरुवार को कहा कि जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों के दौरान मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) के 12 में से 10 अभ्यास किए गए थे, तब कांग्रेस ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी, लेकिन अब वह उसी प्रक्रिया का विरोध कर रही है।

सूरत शहर के भाजपा कार्यालय में पार्टी के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, राय ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे अपनी लगातार चुनावी हार को स्वीकार करने के बजाय, एसआईआर को लेकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि संविधान और ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950’ चुनाव आयोग को मतदाता सूची की समीक्षा करने और उसमें सुधार करने का अधिकार देते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी एसआईआर (एसआईआर) प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध माना है।

राय ने कहा, “एसआईआर का उद्देश्य किसी भी पात्र मतदाता का नाम हटाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि केवल असली और पात्र भारतीय नागरिकों के नाम ही मतदाता सूची में शामिल हों।”

उन्होंने आगे कहा कि देश की मतदाता सूची में केवल उन्हीं लोगों के नाम होने चाहिए जिन्हें कानूनी रूप से वोट देने का अधिकार है।

उन्होंने इस प्रक्रिया के प्रति कांग्रेस के विरोध पर सवाल उठाया और पूछा कि आखिर पार्टी मतदाता सूची में घुसपैठियों के नाम बनाए रखने के लिए इतनी उत्सुक क्यों है?

उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी नागरिकों को मतदाता सूची में बने रहने देने से भारतीय नागरिकों के अधिकारों, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों और देश के संसाधनों पर बुरा असर पड़ सकता है।

उन्होंने जोर देकर कहा, “नाम हटाने से पहले तय प्रक्रियाओं का पालन किया गया था, जिसमें नोटिस जारी करना और संबंधित व्यक्तियों को अपना पक्ष रखने का मौका देना शामिल था।”

एसआईआर के तहत तैयार की गई मतदाता सूची के मसौदे का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 13 करोड़ नाम हटाए गए हैं। इनमें लगभग 6.3 करोड़ ऐसे मतदाता शामिल हैं जो दूसरी जगह चले गए हैं, 3 करोड़ जो अनुपस्थित थे, 2.8 करोड़ ऐसे मतदाता जिनकी मृत्यु हो चुकी है, और 1 करोड़ ऐसी प्रविष्टियां हैं जो डुप्लिकेट थीं।

उन्होंने सवाल किया, “क्या लोकतंत्र में अयोग्य और डुप्लिकेट मतदाताओं के नाम बने रहने चाहिए?” उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए मतदाता सूची में सटीकता और पारदर्शिता होना बहुत जरूरी है।

कांग्रेस के पिछले रिकॉर्ड पर निशाना साधते हुए राय ने कहा कि जिस पार्टी ने कभी देश में आपातकाल लगाया था और ‘लोकतंत्र का गला घोंटा’ था, वह आज लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा करने का दावा कर रही है।

उन्होंने संसदीय कार्यवाही से दूर रहने और उसके बजाय ‘नकली संसद’ सत्र आयोजित करने के लिए भी कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा, “संसद नागरिकों के कल्याण के लिए कानून और नीतियां बनाने का सबसे बड़ा मंच है।”

उन्होंने कहा, “2014 से 2025 के बीच कांग्रेस को 56 विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था, और एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही वह कई चुनाव हार चुकी थी।”

दिल्ली में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की कथित टिप्पणियों का जिक्र करते हुए, राय ने कहा कि उन्होंने भी नामों को हटाने की प्रक्रिया को एक सामान्य प्रक्रिया बताया था। उन्होंने आरोप लगाया, “कांग्रेस अपनी चुनावी हार को स्वीकार करने के बजाय, इस प्रक्रिया को एक राजनीतिक मुद्दा बना रही है।”

–आईएएनएस

एससीएच

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IANS Agency

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