चेन्नई, 28 मार्च (आईएएनएस)। तमिलनाडु की राजनीति में इस समय एआईएडीएमके चर्चा में है। पार्टी पर चेन्नई की अहम विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा में हो रही देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं लेकिन पार्टी की यह सुस्ती उसकी तैयारियों पर सवाल खड़े कर रही है।
राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि बाकी प्रमुख पार्टियां अपनी चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों को लेकर तेजी से आगे बढ़ चुकी हैं। चेन्नई, जो कि 16 विधानसभा सीटों वाला एक अहम शहरी चुनावी मैदान है, वहां की स्थिति एआईएडीएमके के लिए खास मायने रखती है।
इन 16 सीटों में से तीन सीटें सहयोगी दलों (भाजपा, एमएमके और पीएमके) को दी गई हैं। ऐसे में एआईएडीएमके के पास 13 सीटें बचती हैं, जिन पर उसे अपने उम्मीदवार उतारने हैं।
हालांकि, पार्टी अब तक दो चरणों में उम्मीदवारों की सूची जारी कर चुकी है, लेकिन चेन्नई से सिर्फ एक ही नाम घोषित किया गया है। पहले चरण में पूर्व मंत्री डी. जयकुमार को पार्टी के गढ़ माने जाने वाले रोयापुरम से टिकट दिया गया था। इसके बाद से बाकी सीटों पर कोई नई घोषणा नहीं हुई है जबकि राज्य में चुनावी गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, इस देरी की बड़ी वजह आंतरिक खींचतान और वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रही रस्साकशी है। नेतृत्व उम्मीदवार तय करने से पहले स्थानीय प्रभाव, जातीय समीकरण और जीत की संभावनाओं जैसे कई पहलुओं पर विचार कर रहा है।
दरअसल, एआईएडीएमके का चेन्नई संगठन 8 जिलों में बंटा हुआ है, जहां हर जिले में एक जिला सचिव होता है, जिसका स्थानीय स्तर पर काफी प्रभाव होता है। ये नेता अब खुद या अपने समर्थकों के लिए टिकट हासिल करने की कोशिश में जुटे हैं।
इस स्थिति ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को मुश्किल में डाल दिया है, क्योंकि उसे स्थानीय दावेदारों की इच्छाओं और चुनावी जीत की संभावना के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चेन्नई जैसे शहरी इलाकों में समय पर उम्मीदवारों की घोषणा बेहद जरूरी होती है, क्योंकि यहां चुनाव कड़े मुकाबले वाले होते हैं और पहले से तैयारी करना अहम होता है। ऐसे में एआईएडीएमके की यह देरी उसके लिए चुनौती बन सकती है, खासकर तब जब पार्टी इस क्षेत्र में अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है।
–आईएएनएस
वीकेयू/पीएम
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