अंबुमणि रामदास ने कर्नाटक के वनकर्मियों द्वारा तीन तमिलों की हत्या की सीबीआई जांच की मांग की

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चेन्नई, 16 अगस्त (आईएएनएस)। पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने चामराजनगर जिले में कावेरी वन्यजीव अभयारण्य के समीप कर्नाटक वन विभाग के कर्मियों द्वारा तीन तमिल युवकों को गोली मारकर की गई हत्या की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। मृतकों की पहचान एंथोनीसामी, जॉन रोज पीटर और कुमार के रूप में हुई है, जो क्रमशः जगन्नाथोथी, मरियामंगलम और लासरदोथी गांवों के निवासी थे। अंबुमणि ने दावा किया कि कोल्लेगल वन प्रभाग से जुड़े वनरक्षकों ने उन पर गोली चलाई, जबकि वे किसी भी अवैध गतिविधि में…

चेन्नई, 16 अगस्त (आईएएनएस)। पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने चामराजनगर जिले में कावेरी वन्यजीव अभयारण्य के समीप कर्नाटक वन विभाग के कर्मियों द्वारा तीन तमिल युवकों को गोली मारकर की गई हत्या की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। मृतकों की पहचान एंथोनीसामी, जॉन रोज पीटर और कुमार के रूप में हुई है, जो क्रमशः जगन्नाथोथी, मरियामंगलम और लासरदोथी गांवों के निवासी थे।

अंबुमणि ने दावा किया कि कोल्लेगल वन प्रभाग से जुड़े वनरक्षकों ने उन पर गोली चलाई, जबकि वे किसी भी अवैध गतिविधि में शामिल नहीं थे। कर्नाटक वन विभाग का कहना है कि ये लोग हिरण के शिकार के उद्देश्य से जंगल में घुसे थे और मुठभेड़ के दौरान मारे गए। हालांकि, मृतकों के परिजनों ने इस दावे को खारिज करते हुए अधिकारियों पर हत्याओं को छिपाने के लिए फर्जी मुठभेड़ की कहानी गढ़ने का आरोप लगाया है।

अंबुमणि के अनुसार, पीड़ित तमिल परिवारों से थे, जो करीब एक सदी पहले मेत्तूर बांध के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान अपने घर और संपत्ति खोने के बाद चामराजनगर जिले के मरियामंगलम क्षेत्र में आकर बस गए थे। उन्होंने बताया कि ये परिवार आजीविका की तलाश में बाद में कर्नाटक में बस गए।

उनका कहना है कि मरियामंगलम वन क्षेत्र में हिरण के शिकार या वन अधिकारियों और इन लोगों के बीच किसी सशस्त्र मुठभेड़ होने का कोई प्रमाण नहीं है। उन्होंने वन विभाग के इस दावे को भी चुनौती दी कि मृतकों के पास हथियार थे। इन हत्याओं के बाद क्षेत्र के तमिल निवासियों के बीच विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जिससे तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।

स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधियों, जिनमें कांग्रेस विधायक और जिला प्रभारी मंत्री पुट्टरंगा शेट्टी तथा जेडी(एस) विधायक मंजूनाथ शामिल हैं, ने कथित तौर पर सवाल उठाया है कि यह अभियान तड़के क्यों चलाया गया। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी वन विभाग की कार्रवाई की निंदा की है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने घटना को लेकर सामने आए परस्पर विरोधी दावों के बाद मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि, अंबुमणि का कहना है कि केवल मजिस्ट्रियल जांच से पूरी सच्चाई सामने नहीं आएगी और मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए।

उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से कर्नाटक सरकार की निंदा करने तथा तीनों मृतकों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाने के लिए दबाव बनाने की मांग की।

–आईएएनएस

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IANS Agency

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