इटानगर, 19 मई (आईएएनएस)। अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी परनाइक ने मंगलवार को पूर्वोत्तर राज्य में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि यह क्षेत्र सामाजिक-आर्थिक विकास का एक मजबूत स्तंभ बन सकता है।
इटानगर स्थित लोक भवन के एक अधिकारी ने बताया कि राज्यपाल ने अरुणाचल प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को और अधिक बढ़ावा देने का आह्वान किया और कहा कि इस क्षेत्र में राज्य के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता है।
भारत भर में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाने के लिए राज्य और केंद्र सरकारों के साथ रणनीतिक साझेदारी का नेतृत्व करने वाले ईशान इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी शांतनु श्रीवास्तव से बातचीत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह क्षेत्र युवाओं, महिलाओं, कारीगरों, किसानों और स्वयं सहायता समूहों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर पैदा कर सकता है।
मंगलवार को नई दिल्ली में हुई बातचीत के दौरान केटी परनाइक ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश अपने समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों, आदिवासी शिल्पकला, जैविक खेती की क्षमता, वन उत्पादों, पर्यटन संभावनाओं और अनूठी सांस्कृतिक विरासत के साथ उद्यमिता और स्थानीय उद्यम विकास के लिए अपार संभावनाएं प्रदान करता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम समाज के विभिन्न वर्गों, विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं।
राज्यपाल ने कहा कि फूड प्रोसेसिंग, बांस और बेंत के उत्पाद, हथकरघा और हस्तशिल्प, पर्यावरण पर्यटन, बागवानी, हर्बल उत्पाद, जैविक कृषि और लघु विनिर्माण जैसे क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए अपार संभावनाएं रखते हैं।
उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम आत्मनिर्भरता को मजबूत कर सकते हैं, बेरोजगारी कम कर सकते हैं और रोजगार की तलाश में युवाओं के शहरों की ओर पलायन को रोक सकते हैं।
राज्यपाल ने यह भी बताया कि यह क्षेत्र स्थानीय उद्यमियों को आत्मविश्वास हासिल करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद कर सकता है, साथ ही पारंपरिक कौशल और स्वदेशी ज्ञान को संरक्षित करने में भी सहायक हो सकता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बेहतर बुनियादी ढांचे, वित्तीय सहायता, कौशल विकास, बाजार संपर्क और डिजिटल पहुंच के साथ, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम समावेशी विकास को गति दे सकते हैं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं और आत्मनिर्भर अरुणाचल और विकसित भारत की परिकल्पना में योगदान दे सकते हैं।
–आईएएनएस
एमएस/
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