बंगाल चुनाव: इन तीन अधिकारियों ने संभाली पूरी प्रक्रिया, एसआईआर से काउंटिंग तक शांतिपूर्ण रहा माहौल

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कोलकाता, 5 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 कई मायनों में खास रहे हैं। राज्य के चुनावी हिंसा के इतिहास के विपरीत इस बार शांतिपूर्ण मतदान और रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत देखने को मिला। इस सफलता के पीछे मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के तीन वरिष्ठ अधिकारियों की अहम भूमिका रही, जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर पूरी प्रक्रिया का कुशल संचालन किया। इन अधिकारियों में पश्चिम बंगाल के सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल, विशेष चुनाव पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता और विशेष पुलिस पर्यवेक्षक एन.के. मिश्रा शामिल हैं। इन तीनों को “थ्री मस्किटियर्स” के रूप में देखा जा रहा है। पिछले साल नवंबर…

कोलकाता, 5 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 कई मायनों में खास रहे हैं। राज्य के चुनावी हिंसा के इतिहास के विपरीत इस बार शांतिपूर्ण मतदान और रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत देखने को मिला। इस सफलता के पीछे मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के तीन वरिष्ठ अधिकारियों की अहम भूमिका रही, जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर पूरी प्रक्रिया का कुशल संचालन किया।

इन अधिकारियों में पश्चिम बंगाल के सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल, विशेष चुनाव पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता और विशेष पुलिस पर्यवेक्षक एन.के. मिश्रा शामिल हैं। इन तीनों को “थ्री मस्किटियर्स” के रूप में देखा जा रहा है।

पिछले साल नवंबर से शुरू हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से लेकर मतदान और मतगणना तक पूरी प्रक्रिया इनके कुशल प्रशासनिक प्रबंधन के कारण सुचारु रूप से संपन्न हुई। हालांकि इस दौरान इन्हें सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी सरकार की ओर से विरोध, प्रशासनिक असहयोग, सार्वजनिक आलोचना और कानूनी अड़चनों जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

इसके बावजूद, इन अधिकारियों ने पेशेवर तरीके से सभी बाधाओं को पार करते हुए देश में स्वतंत्रता के बाद का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत और पूरी तरह शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित किया।

सीईओ अग्रवाल, 1990 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और इस पद के लिए चुनाव आयोग की पहली पसंद थे। उनकी शांत स्वभाव, पारदर्शिता और पेशेवर दक्षता के कारण चुनाव आयोग ने उनके सुझावों को लगभग बिना सवाल स्वीकार किया। बताया जाता है कि इस बार केवल दो चरणों में चुनाव कराने का निर्णय भी उनका ही सुझाव था, जबकि पिछले चुनावों में 6-7 चरणों में मतदान होता था।

वहीं, विशेष चुनाव पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता, जो आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र और तकनीकी विशेषज्ञ माने जाते हैं, उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित किया। एसआईआर के दौरान एआई की मदद से संदिग्ध मतदाताओं की पहचान कर फर्जी वोटरों को हटाया गया, जबकि मतदान के दौरान भी इससे अनियमितताओं को रोका गया।

तीसरे अहम अधिकारी विशेष पुलिस पर्यवेक्षक एन.के. मिश्रा हैं, जो 1988 बैच के सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी हैं। पश्चिम बंगाल में लंबे अनुभव के चलते उन्होंने केंद्रीय बलों की अग्रिम तैनाती, प्रभावी उपयोग और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया, जिससे मतदान और मतगणना पूरी तरह शांतिपूर्ण रही।

इन तीनों अधिकारियों की रणनीति और समन्वय के चलते पश्चिम बंगाल में इस बार का चुनाव प्रशासनिक दक्षता और शांतिपूर्ण माहौल के लिए मिसाल बनकर उभरा है।

–आईएएनएस

डीएससी

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