कोलकाता, 21 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार ने शुक्रवार को एक अधिसूचना जारी कर राज्य में 2021 से 2026 के बीच जारी जन्म प्रमाण पत्रों के पुनर्सत्यापन का आदेश दिया है। ये प्रमाण पत्र ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के पिछले पांच वर्षों के दौरान जारी किए गए थे।
पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल के कार्यालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया कि पुनर्सत्यापन में डिजिटल और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से जारी किए गए जन्म प्रमाण पत्र शामिल होंगे। यह कार्य उप-विभागीय अधिकारियों (एसडीओ) और ब्लॉक विकास अधिकारियों (बीडीओ) को सौंपा गया है।
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के सत्ता में आने के बाद सरकार ने कहा कि उसने पिछली सरकार के दौरान, विशेष रूप से पिछले पांच वर्षों में जन्म प्रमाण पत्र जारी करने में कई अनियमितताएं देखी थीं।
हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के संज्ञान में बड़ी संख्या में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र आए।
इसीलिए नई राज्य सरकार ने पिछले पांच वर्षों के दौरान जारी किए गए सभी जन्म प्रमाण पत्रों का पुन: सत्यापन करने का निर्णय लिया है। अधिसूचना के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में बीडीओ और शहरी क्षेत्रों में एसडीओ प्रमाण पत्रों का सत्यापन करेंगे।
आवश्यकता पड़ने पर, बीडीओ और एसडीओ को इस उद्देश्य के लिए जांच दल गठित करने का अधिकार होगा। नबन्ना स्थित राज्य सचिवालय के एक अधिकारी ने बताया कि विलंबित पंजीकरणों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
राज्य सरकार ने यह भी कहा कि जन्म प्रमाण पत्र जारी करते समय सत्यापित दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्धारित नियमों का पालन किया गया है या नहीं।
अधिसूचना के अनुसार, पुनर्सत्यापन प्रक्रिया के दौरान जांचे गए दस्तावेजों और उनके परिणामों को ‘जन्म-मृत्यु सूचना पोर्टल’ पर अपलोड किया जाना चाहिए। मुख्य सचिव कार्यालय ने प्रत्येक जन्म प्रमाण पत्र के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का भी निर्देश दिया है।
रिपोर्ट में यह उल्लेख होना चाहिए कि संबंधित जन्म प्रमाण पत्र असली, नकली या दोषपूर्ण थे। इसके अलावा, बीडीओ और एसडीओ को प्रमाण पत्र जारी करने वाले व्यक्ति के अधिकार पर भी विचार करने के लिए कहा गया है।
राज्य सचिवालय के एक सूत्र ने बताया कि यदि कोई प्रमाण पत्र नकली या अवैध पाया जाता है, तो इसका विशिष्ट कारण दस्तावेज में दर्ज किया जाना चाहिए। बीडीओ और एसडीओ को सितंबर तक इस सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
–आईएएनएस
एमएस/
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