Master Plan 2047/ प्रगनेश सिंह : दिल्ली में नया फार्म हाउस बनाना मास्टर प्लान-2047 में पहले के मुकाबले काफी कठिन हो गया है। सबसे बड़ा बदलाव जमीन के आकार का है। पुराने मास्टर प्लान में करीब 4,000 वर्ग मीटर यानी लगभग एक एकड़ जमीन से लो डेंसिटी आवासीय विकास का रास्ता था, जबकि नए मास्टर प्लान में फार्म हाउस के लिए न्यूनतम जमीन 10,000 वर्ग मीटर यानी एक हेक्टेयर या करीब 2.47 एकड़ कर दी गई है। इतना ही नहीं, निर्माण की अनुमति भी घटाई गई है और सड़क की शर्त कड़ी कर दी गई है।
पुराने नियमों में 0.4 हेक्टेयर के प्लॉट पर एफएआर 20 था और निर्धारित शुल्क के साथ इसे 30 तक बढ़ाने का प्रावधान था। अधिकतम ऊंचाई 12 मीटर और कम से कम छह मीटर चौड़ी सड़क की जरूरत थी। इसके मुकाबले नए मास्टर प्लान में फार्म हाउस का न्यूनतम प्लॉट ढाई गुना बढ़कर एक हेक्टेयर हो गया है, जबकि एफएआर घटकर 10 रह गया है। अधिकतम ऊंचाई भी 10 मीटर होगी और सबसे बड़ा व्यावहारिक बदलाव यह है कि प्लॉट की पहुंच कम से कम 18 मीटर चौड़ी सड़क से होनी चाहिए। एक प्लॉट पर एक ही मुख्य आवासीय इकाई यानी फार्म हाउस बनेगा। इसके साथ 30-30 वर्ग मीटर से छोटे दो सर्विस स्टाफ आवास की अनुमति होगी।
मुश्किल बढ़ी तो दूसरा रास्ता भी मिला
नए प्लान में बड़ी राहत जमीन के वैकल्पिक इस्तेमाल को लेकर है। एक हेक्टेयर के प्लॉट पर संस्थागत श्रेणी में अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, शोध और कौशल विकास संस्थान, कोचिंग संस्थान, सह-कार्य स्थल तथा वृद्धाश्रम खोले जा सकेंगे। इस श्रेणी में एफएआर 120 और ऊंचाई 18 मीटर तक रखी गई है।
इसी तरह एक हेक्टेयर जमीन पर बैंक्वेट, थीम या मनोरंजन पार्क, खेल सुविधाएं, क्लब, कन्वेंशन और प्रदर्शनी केंद्र, आर्ट गैलरी और लाइब्रेरी का रास्ता दिया गया है। वेयरहाउस, गोदाम और वितरण केंद्र के अलावा रिटेल दुकानें, कृषि प्रसंस्करण इकाइयां, कोल्ड स्टोरेज, मंडियां, थोक बाजार, वाहन पार्किंग और सोलर फार्म जैसी गतिविधियों की भी अनुमति होगी। यानी जिस बड़ी जमीन पर आवासीय फार्म हाउस का निर्माण सीमित किया गया है, उसके आर्थिक इस्तेमाल के विकल्प पहले से ज्यादा किए गए हैं।
फार्म हाउस का दायरा दक्षिण दिल्ली से बाहर भी
एक और बड़ा बदलाव क्षेत्र के विस्तार का है। नए प्लान में पुराने लो डेंसिटी रेजिडेंशियल एरिया को अब करीब 150 वर्ग किलोमीटर के लो डेंसिटी एरिया का हिस्सा बनाया गया है। इसमें पुराने एलडीआरए के साथ दिल्ली की सीमा पर स्थित अंतिम पेरिफेरल गांव की एक राजस्व सीमा की गहराई तक का क्षेत्र शामिल है। यहां कम घनत्व और पर्यावरणीय स्वरूप बनाए रखते हुए विकास होगा।
पुराने लो डेंसिटी रेजिडेंशियल क्षेत्र की सूची में सैदुलाजाब-सयूरपुर, सतबड़ी, छतरपुर, खानपुर, देवली, भाटी, फतेहपुर बेरी, असोला, जौनापुर, चंदन हुला, गदाईपुर, सुल्तानपुर, महरौली, रजोकरी, समालखा, घिटोरनी, रंगपुरी, होलंबी खुर्द, बकोली, बख्तावरपुर, हिरंकी, बिजवासन और बामनोली समेत 23 राजस्व गांव हैं। इसके अलावा नए एलडीए में दिल्ली की सीमा से लगे 47 पेरिफेरल गांवों के संबंधित क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं।
इनमें कापसहेड़ा, सलाहपुर, बदूसराय, ढांसा, घुमनहेड़ा, जटिकरा, कैर, कंगनहेड़ी, मुंढेला कलां, मुंढेला खुर्द, बकानेर, घोघा, लामपुर, हमीदपुर, पल्ला, सिंघु, औचंदी, मुंगेशपुर, कुतुबगढ़, जौंती और मंडोली समेत बाहरी दिल्ली के गांव शामिल हैं। बिजवासन, रजोकरी, बामनोली, झड़ौदा कलां और टिकरी कलां जैसे कुछ गांवों का केवल निर्धारित हिस्सा सूची में है।


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