कोलकाता, 5 नवंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की नई औद्योगिक नीति जारी करने के तुरंत बाद, मुख्यमंत्री ने नई और प्रस्तावित औद्योगिक इकाइयों के लिए जमीन अधिग्रहण का एक वैकल्पिक रास्ता घोषित किया। इस रास्ते में निवेशकों, जमीन मालिकों और अन्य हितधारकों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा अपनाई जाने वाली नई भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया, वाम मोर्चा सरकार या तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा अपनाई गई प्रक्रियाओं से बिल्कुल अलग होगी।
उनके अनुसार, उनकी सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति का मुख्य हिस्सा यह होगा कि राज्य सरकार सीधे जमीन मालिकों से जमीन खरीदेगी और इस तरह राज्य में एक ‘लैंड बैंक’ (भूमि भंडार) तैयार करेगी।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इसके बाद, इस लैंड बैंक से जरूरी जमीन नई और प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं के लिए सौंप दी जाएगी।
उन्होंने आगे कहा, “वाम मोर्चा सरकार ने औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन मालिकों से जबरन जमीन अधिग्रहण की नीति अपनाई थी, जिसका हम कड़ा विरोध करते हैं। तृणमूल कांग्रेस ने नए उद्योगों के लिए जमीन जुटाने में कोई भूमिका नहीं निभाई, जो बड़े निवेश को आकर्षित करने के मामले में एक नकारात्मक कारक साबित हुआ। हम इन दोनों में से किसी भी नीति को नहीं अपनाएंगे; इसके बजाय, राज्य सरकार सीधे जमीन मालिकों से जमीन खरीदेगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि जमीन मालिकों से सीधे खरीदी गई जमीन से बनने वाले लैंड बैंक के अलावा, राज्य सरकार नए औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन, राज्य के मौजूदा औद्योगिक पार्कों और सरकार द्वारा अतिक्रमण से मुक्त कराई गई जमीनों से भी उपलब्ध कराएगी।
उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व वाली नई राज्य सरकार के पहले छह महीनों में ही 33 व्यावसायिक समूहों को जमीन सौंपी जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “हम नई औद्योगिक इकाइयों के लिए जमीन की जरूरतें पूरी करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”
उद्योग और आर्थिक मामलों के जानकारों का भी मानना है कि राज्य सरकार द्वारा सीधे जमीन मालिकों से जमीन खरीदना और फिर उसे नई औद्योगिक इकाइयों को सौंपना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत थी।
कोलकाता के अर्थशास्त्री प्रोबीर मुखर्जी ने कहा, “पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में, जहां जमीन का मालिकाना हक बहुत छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटा हुआ है, वहां राज्य सरकार की भूमिका के बिना बड़े निवेश को आकर्षित करना कभी संभव नहीं होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि जबरन जमीन अधिग्रहण उल्टा पड़ सकता है, जैसा कि वाम मोर्चा के शासनकाल में सिंगुर और नंदीग्राम के मामलों में हुआ था। मुखर्जी ने कहा, “राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई नई भूमि नीति आदर्श होगी, क्योंकि यह निवेशकों, जमीन मालिकों और अन्य हितधारकों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखती है।”
–आईएएनएस
एससीएच
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