हैदराबाद, 20 अगस्त (आईएएनएस)। तेलंगाना विधानसभा में उपनेता टी. हरीश राव ने गुरुवार को राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी को उनके पद से हटाने की मांग की है। दरअसल, उनके ऊपर पैसे की वसूली और मनमाने तरीके से तेलंगाना में सेक्शन 22 ए के तहत निजी क्षेत्रों की संपत्तियों को जब्त करने का आरोप लगा है। उन्होंने कहा कि यह आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। ऐसी स्थिति में इनकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
विधानसभा में उपनेता हरीश राव ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखा। उन्होंने पत्र में इस मामले की स्वतंत्र न्यायिक और भ्रष्टाचार रोधी जांच की मांग की।
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) नेता ने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं का ध्यान रेवेन्यू और रजिस्ट्रेशन मशीनरी के दुरूपयोग की ओर आकृष्ट किया। साथ ही, उन्होंने रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 के 22 ए के तहत जिस तरह से निजी संपत्तियों का जबरन समावेश किया जा रहा है, उसका भी जिक्र मंत्री की ओर से किया गया।
उन्होंने अपने पत्र में कहा कि श्रीनिवास रेड्डी के अंतर्गत आने वाले राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर जिस तरह के आरोप लगे हैं, वो चिंताजनक है। इसके अलावा, उन्होंने अपने पत्र में सीएम रेवंत रेड्डी को पूरे सिस्टम की निगरानी करने के मामले में पूरी तरह से विफल बताया।
हरिश राव ने अपने पत्र में सेक्शन 22 ए का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस सेक्शन का मुख्य उद्देश्य कानूनी तरीके से जब्त की गई संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन करने से रोकना है। इसका इस्तेमाल कृत्रिम स्वामित्व विवाद पैदा करने, वास्तविक निजी संपत्तियों को फ्रीज करने या नागरिकों के वैध लेनदेन को बाधित करने के लिए नहीं किया जा सकता है।
बीआरएस नेता ने पत्र में कहा, “राजस्व रिकॉर्ड के अपडेट और भू भारती में परिवर्तन के दौरान हजारों निजी संपत्तियों, एचएमडीए/जीएचएमसी द्वारा अनुमोदित लेआउट और लंबे समय से स्वामित्व वाली निजी पट्टा भूमि को कथित तौर पर सरकारी या सीमा-अधिशेष भूमि के रूप में वर्गीकृत किया गया है या अन्यथा निषिद्ध-संपत्ति व्यवस्था के अंतर्गत लाया गया है।”
उन्होंने कहा कि हैदराबाद, मेडचल मलकाजगिरि, रंगा रेड्डी और संगारेड्डी के साथ-साथ जुबली हिल्स, बंजारा हिल्स और निज़ामपेट जैसे स्थापित क्षेत्रों में सामने आए प्रभाव विशेष रूप से चिंताजनक हैं। आरोप हैं कि शहरी भूमि सीमा (यूएलसी) ढांचे के तहत दशकों पहले नियमित की गई संपत्तियों को फिर से टैग किया जा रहा है या उन पर नए दावे किए जा रहे हैं, जिससे स्थापित स्वामित्वों पर कृत्रिम संदेह पैदा हो रहा है और उनकी बिक्री पर गंभीर असर पड़ रहा है।
हरीश राव ने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि धारा 22ए के तहत लगाए गए प्रतिबंधों का इस्तेमाल अवैध वसूली के लिए किया जा रहा है, जिसमें वास्तविक संपत्ति मालिकों को कथित तौर पर डी-नोटिफिकेशन या पंजीकरण मंजूरी के लिए बिचौलियों से संपर्क करने के लिए मजबूर किया जा रहा है और मांगें कथित तौर पर बाजार मूल्य के 30 प्रतिशत तक पहुंच रही हैं।
इन आरोपों के लिए स्वतंत्र सत्यापन की आवश्यकता बताते हुए बीआरएस नेता ने यह पता लगाने का आह्वान किया कि संपत्तियों को जोड़ने और हटाने के लिए कौन जिम्मेदार है, ऐसे अतिरिक्त संपत्तियों और बाद में उन्हें हटाने से किसे लाभ होता है, जिम्मेदारी की पूरी प्रशासनिक श्रृंखला क्या है, क्या इन लेन-देन में मध्यस्थ शामिल हैं और क्या इसमें राजनीतिक रूप से जुड़े व्यक्ति या निजी गिरोह शामिल हैं।
पत्र में लिखा है, “इन सवालों का जवाब प्रेस विज्ञप्तियों या नियमित समीक्षा बैठकों से नहीं दिया जा सकता। यदि आरोप झूठे हैं, तो एक स्वतंत्र जांच से यह साबित हो जाएगा; यदि सच हैं, तो दोषियों को कानून का सामना करना होगा।”
–आईएएनएस
एसएचके/पीएम
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