कलकत्ता हाई कोर्ट ने आईएएस-आईपीएस तबादलों को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

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कोलकाता, 27 मार्च (आईएएनएस)। कलकत्ता हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने शुक्रवार को जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इस याचिका में चुनाव वाले पश्चिम बंगाल में नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादलों, बदलावों और डेपुटेशन को लेकर भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के फैसले को चुनौती दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई संपन्न हुई। सुनवाई के अंत में, पीठ ने भारत निर्वाचन आयोग को नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादलों, प्रतिस्थापनों और प्रतिनियुक्तियों से संबंधित सभी दस्तावेज 30 मार्च को न्यायालय में…

कोलकाता, 27 मार्च (आईएएनएस)। कलकत्ता हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने शुक्रवार को जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इस याचिका में चुनाव वाले पश्चिम बंगाल में नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादलों, बदलावों और डेपुटेशन को लेकर भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के फैसले को चुनौती दी गई थी।

मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई संपन्न हुई। सुनवाई के अंत में, पीठ ने भारत निर्वाचन आयोग को नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादलों, प्रतिस्थापनों और प्रतिनियुक्तियों से संबंधित सभी दस्तावेज 30 मार्च को न्यायालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इसके बाद फैसला सुनाया जाएगा।

सुनवाई के दौरान, चुनाव आयोग के वकील ने दलील दी कि इस तरह के तबादले, बदलाव और डेपुटेशन सिर्फ पश्चिम बंगाल तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि चुनाव वाले दूसरे राज्यों में भी इसी तरह के कदम उठाए गए हैं।

आयोग के वकील ने याचिकाकर्ता और पश्चिम बंगाल सरकार के उन आरोपों का भी खंडन किया कि राज्य में तबादलों का पैमाना अन्य चुनाव वाले राज्यों की तुलना में कहीं अधिक था।

चुनाव आयोग के वकील ने तर्क दिया कि बिहार में पिछले विधानसभा चुनाव से पहले 48 अधिकारियों का तबादला किया गया था। इन तबादलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर किया गया था, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। महाराष्ट्र में कुल 61, उत्तर प्रदेश में 83 और मध्य प्रदेश में 49 अधिकारियों का तबादला इन राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले किया गया था। पश्चिम बंगाल में केवल 23 नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों का तबादला किया गया था।

दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद, खंडपीठ ने अपना फैसला तब तक के लिए सुरक्षित रखने का निर्णय लिया जब तक कि चुनाव आयोग अधिकारियों के तबादलों, प्रतिस्थापनों और प्रतिनियुक्तियों से संबंधित सभी प्रासंगिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर देता।

इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को राज्य में बड़ी संख्या में नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादलों को लेकर आयोग की फिर से आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के बड़े पैमाने पर फेरबदल से सुचारू प्रशासनिक कामकाज में बाधा उत्पन्न हो रही है।

–आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

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