नई दिल्ली, 15 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘सेमीकॉन 1.0’ की सफलता के बाद घरेलू सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए ‘सेमीकॉन 2.0’ स्कीम को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 1,27,500 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है।
सरकार के अनुसार, अब तक 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कुल निवेश प्रस्तावित है। इनमें एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक इंटीग्रेटेड गैलियम नाइट्राइड माइक्रो एलईडी डिस्प्ले फैब और नौ पैकेजिंग यूनिट्स शामिल हैं। ये इकाइयां उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक उपकरण, ऑटोमोबाइल, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, एयरोस्पेस सहित कई क्षेत्रों की चिप जरूरतों को पूरा करेंगी।
मंजूर की गई 12 परियोजनाओं में से माइक्रोन, केयन्स और सीजी सेमी ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है, जबकि एक अन्य यूनिट के वर्ष 2026 में उत्पादन शुरू करने की उम्मीद है।
सरकार ने स्टार्टअप और एमएसएमई क्षेत्र को भी बढ़ावा दिया है। अब तक 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता के लिए मंजूरी दी गई है, जबकि 105 स्टार्टअप और एमएसएमई को उद्योग में इस्तेमाल होने वाले अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए) टूल्स तक पहुंच उपलब्ध कराई गई है।
कैबिनेट के बयान के अनुसार, ‘सेमीकॉन 2.0’ का उद्देश्य ‘सेमीकॉन 1.0’ से मिली गति को आगे बढ़ाते हुए भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
सरकार ने बताया कि सेमीकॉन 2.0 छह प्रमुख स्तंभों (पिलर्स) पर आधारित होगा।
पहला स्तंभ चिप डिजाइन है। सरकार का कहना है कि 105 स्टार्टअप पहले ही चिप डिजाइन पर काम शुरू कर चुके हैं। अब इस डिजाइन इकोसिस्टम को और मजबूत करते हुए स्वदेशी चिप और सिस्टम डिजाइन के साथ-साथ बौद्धिक संपदा (आईपी) विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
दूसरा स्तंभ मशीनों और कच्चे माल से जुड़ा है। सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाली मशीनों, सामग्री, रसायनों और गैसों के निर्माण तथा अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) में लगी कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे देश में सेमीकंडक्टर उद्योग के साथ-साथ उच्च-परिशुद्धता (प्रिसिजन) विनिर्माण उद्योग की भी मजबूत नींव तैयार होगी।
तीसरा स्तंभ नई फैब इकाइयों की स्थापना है। सरकार ने कहा कि पहली सेमीकंडक्टर फैब वर्ष 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है और भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति पर दुनिया का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अधिक से अधिक वैश्विक कंपनियों को भारत में फैब स्थापित करने के लिए आकर्षित किया जाएगा।
चौथा स्तंभ एटीएमपी और ओसैट (ओएसएटी) इकाइयों का विस्तार है। सरकार के अनुसार, भारत में एटीएमपी इकाइयों की सफलता के बाद दुनिया अब देश को एक वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र के रूप में देख रही है। इसलिए अत्याधुनिक एटीएमपी तकनीकों को भारत लाने और इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
पांचवां स्तंभ अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) है। फिलहाल भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा 28 नैनोमीटर से 110 नैनोमीटर तकनीक से शुरू हुई है। अब देश और विदेश के अग्रणी अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से इससे भी अधिक उन्नत तकनीकों और नए नोड्स के विकास पर काम किया जाएगा।
छठा और अंतिम स्तंभ कुशल मानव संसाधन तैयार करना है। सरकार के अनुसार, देश की 315 विश्वविद्यालयों में नवीनतम ईडीए टूल्स की मदद से चिप डिजाइन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और अब तक लगभग 68,000 छात्र प्रशिक्षित हो चुके हैं। अब इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को और व्यापक तथा गहन बनाया जाएगा, ताकि कॉलेज स्तर पर ही छात्रों को अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर तकनीक का बेहतर प्रशिक्षण मिल सके।
–आईएएनएस
डीबीपी
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