गांधीनगर, 15 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात में 30 जून से शुरू हुई मौजूदा निगरानी अवधि के दौरान चांदीपुरा वायरस के 41 लैब में पुष्टि किए गए मामले सामने आए हैं, जबकि इस संक्रमण से 27 लोगों की मौत हो चुकी है। यह जानकारी राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी ताजा आंकड़ों में दी गई।
14 अगस्त शाम 5 बजे तक राज्य में चांदीपुरा वायरस के 257 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से 246 नमूनों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है, जबकि 11 नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार है।
अब तक जांचे गए नमूनों में से 41 मामलों में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि हुई है। ताजा आंकड़े बताते हैं कि संक्रमण के मामलों में पहले की तुलना में काफी बढ़ोतरी हुई है।
21 जुलाई को राज्य में 63 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से 12 मामलों की पुष्टि हुई थी और आठ रिपोर्ट लंबित थीं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी थी और घरों तथा पशुशालाओं के आसपास संक्रमण फैलाने वाले कीटों पर नियंत्रण के उपाय किए थे।
चांदीपुरा वायरस एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से जुड़ा एक संक्रमण है, जो मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है।
यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित सैंडफ्लाई (रेतीली मक्खी) के जरिए फैलता है। इसके प्रकोप की घटनाएं आमतौर पर मध्य और पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में देखी जाती हैं।
नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के अनुसार, इस वायरस से अचानक तेज बुखार और तंत्रिका तंत्र (न्यूरोलॉजिकल) से जुड़े लक्षण दिखाई दे सकते हैं। खासतौर पर 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे इसके प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
स्वास्थ्य विभाग प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी और रोकथाम के उपाय कर रहा है। इसके तहत घर-घर जाकर लोगों की जांच की जा रही है और सैंडफ्लाई पर नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।
प्रकोप के शुरुआती चरण में अधिकारियों ने बताया था कि प्रभावित गांवों में निगरानी का दायरा बढ़ाया गया है। साथ ही कीटनाशकों का छिड़काव, स्वच्छता अभियान और जागरूकता कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं।
यह ताजा प्रकोप ऐसे समय में सामने आया है, जब दो वर्ष पहले भी गुजरात चांदीपुरा वायरस के बड़े प्रकोप से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल था।
फिलहाल चांदीपुरा वायरस के लिए कोई विशेष एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। तेज बुखार, उल्टी, दौरे पड़ना, मानसिक स्थिति में बदलाव और अन्य तंत्रिका संबंधी लक्षण तेजी से गंभीर स्थिति में बदल सकते हैं। इसलिए ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
इस संक्रमण से बचाव के लिए सैंडफ्लाई के संपर्क को कम करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना, मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करना, साथ ही स्वच्छता बनाए रखना और कीट नियंत्रण उपाय अपनाना जरूरी है।
–आईएएनएस
एएमटी/डीएससी
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