चंडीगढ़, 29 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने शुक्रवार को यहां उत्तरी सेक्टर और हवाई अड्डा सेक्टर में परिचालन तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था का आकलन करने के लिए एक परिचालन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न इकाइयों के कमांडरों ने भाग लिया, जहां सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने, बेहतर अंतर-एजेंसी समन्वय के माध्यम से प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ाने और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और नागरिक उड्डयन प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
सीमावर्ती और रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों, विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में उभरती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए यह समीक्षा महत्वपूर्ण है।
बैठक में ड्रोन से संबंधित चुनौतियों, तोड़फोड़ रोधी उपायों और आपदा प्रतिक्रिया क्षमताओं सहित उभरते खतरों के खिलाफ तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
निम्न ऊंचाई वाले हवाई खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए, सीआईएसएफ ने भारतीय सेना के सहयोग से अपने कर्मियों के लिए चरणबद्ध ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। कई विशेष स्थानों पर आयोजित इस कार्यक्रम के तहत कर्मियों को शत्रुतापूर्ण मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएवी) का पता लगाने, उनका पीछा करने और उन्हें निष्क्रिय करने की उन्नत क्षमताएं प्रदान की जाती हैं।
बैठक में आतंकवाद-विरोधी, त्वरित प्रतिक्रिया और आपदा प्रबंधन के क्षेत्रों में भारतीय सेना और अन्य एजेंसियों के साथ किए जा रहे संयुक्त प्रशिक्षण पहलों की भी समीक्षा की गई।
सीएसआई कर्मियों ने सामरिक प्रतिक्रिया और आपातकालीन स्थिति से निपटने की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए विभिन्न सेना प्रतिष्ठानों और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के साथ विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम किए हैं।
विमानन क्षेत्र में, सीआईएसएफ ने सुरक्षा के अंतर्गत आने वाले वाणिज्यिक हवाई अड्डों पर प्रमुख तकनीकी और परिचालन उन्नयन की प्रगति की समीक्षा की।
चर्चा परिधि सुरक्षा को मजबूत करने, निगरानी नेटवर्क को उन्नत करने और विश्व स्तरीय विमानन सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए अगली पीढ़ी के स्क्रीनिंग उपकरणों को अपनाने पर केंद्रित थी।
सीआईएसएफ अपने हवाईअड्डे की क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी) को मजबूत करने के लिए एक समर्पित अभियान चला रही है।
अब तक, 49 विमानन सुरक्षा समूहों के 659 कर्मियों ने कठोर सैन्य-स्तरीय ‘युद्धकालीन प्रशिक्षण’ सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
बल का लक्ष्य 2026 के अंत तक अपने सुरक्षा दायरे में सभी 72 हवाई अड्डों पर तैनात क्यूआरटी कर्मियों को इस प्रशिक्षण से लैस करना है।
इस क्षेत्र में विशेष अनुसंधान और प्रशिक्षण स्थापित करने के लिए, गृह मंत्रालय के समक्ष सीआईएसएफ विमानन सुरक्षा अकादमी (सीएएसए) की स्थापना का प्रस्ताव विचाराधीन है।
–आईएएनएस
एमएस/
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