नई दिल्ली, 4 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने लगातार एक साल और चार दिन का समय बिना किसी ऑपरेशनल हताहत (जवानों की मौत या घायल होने) के पूरा कर लिया है। 47 वर्षों में यह अपनी तरह की पहली उपलब्धि है। सीआरपीएफ के पूर्व महानिरीक्षक अरुण कुमार ने इस उपलब्धि को एक अहम पड़ाव बताया है। उन्होंने इसका श्रेय रणनीतिक बदलावों, जवानों, ग्राउंड कमांडरों, वरिष्ठ नेतृत्व और गृह मंत्रालय को दिया है।
रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर हेमंत महाजन (रिटायर्ड) ने इस उपलब्धि का श्रेय आतंकवाद, उग्रवाद और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इलाकों में बेहतर सुरक्षा स्थिति और सुरक्षा बलों के बीच बेहतर तालमेल को दिया है।
लगभग 3.5 लाख जवानों वाली सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर, वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों और अन्य ऐसी जगहों पर तैनात है, जहां सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मदद की जरूरत होती है।
महाजन ने बताया कि सेना के लगातार अभियानों और सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के बीच प्रभावी तालमेल के कारण जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा हालात काफी बेहतर हुए हैं।
उन्होंने पूर्वोत्तर में उग्रवाद से जुड़ी हिंसा में कमी आने की ओर भी इशारा किया, जिसमें नागा और कुकी समुदायों के बीच तनाव में आई कमी भी शामिल है।
छत्तीसगढ़ का जिक्र करते हुए महाजन ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद, जो हाल के वर्षों तक बस्तर क्षेत्र में सक्रिय था, अब राज्य से पूरी तरह खत्म हो गया है।
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में बेहतर सुरक्षा माहौल के कारण ही सीआरपीएफ अपने अभियानों को बिना किसी जवान की जान गंवाए सफलतापूर्वक पूरा कर पाई है।
इस बीच, सीआरपीएफ के पूर्व महानिरीक्षक (आईजी) अरुण कुमार ने इस उपलब्धि को एक अहम पड़ाव बताया। उन्होंने इसका श्रेय सभी स्तरों के जवानों, ग्राउंड कमांडरों, वरिष्ठ नेतृत्व और गृह मंत्रालय को दिया।
कुमार ने कहा कि बल की कार्यप्रणाली में किए गए रणनीतिक बदलावों और सुधारों ने यह सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई कि इस दौरान किसी भी सीआरपीएफ जवान की जान न जाए।
उन्होंने कहा, “यह एक बड़ी उपलब्धि है, और इसका श्रेय सभी जवानों, ग्राउंड कमांडरों, वरिष्ठ नेतृत्व और गृह मंत्रालय को जाता है। बल की कार्यप्रणाली में किए गए रणनीतिक बदलावों और सुधारों ने इस मुकाम तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाई है। 47 वर्षों में यह पहली बार है जब ऐसी उपलब्धि हासिल हुई है, जहां अभियानों के दौरान सीआरपीएफ का कोई भी जवान शहीद नहीं हुआ।”
उन्होंने बताया कि जवानों की सुरक्षा बेहतर होने के पीछे तकनीकी प्रगति भी एक प्रमुख कारण रही है, खासकर उन इलाकों में जहां आईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) हमलों का खतरा अधिक रहता है। कुमार ने कहा, “कोई हताहत न होने के मुख्य कारणों में से एक तकनीक का इस्तेमाल है। वाहनों में सुधार हुआ है, जिससे आईईडी विस्फोटों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सका है। अब हमारे पास बुलेटप्रूफ जैकेट भी हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि हथियारों, ऑपरेशनल रणनीति, खुफिया जानकारी जुटाने और चिकित्सा सुविधाओं में भी सुधार किए गए हैं।
कुमार ने कहा कि आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां लगातार बदल रही हैं, जिसके लिए बल को अपनी रणनीतियों और ऑपरेशनल क्षमताओं में नियमित रूप से बदलाव करने की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा, “हर दिन नई और चुनौतीपूर्ण स्थितियां सामने आ रही हैं। देश की आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखने में कई बड़ी चुनौतियां हैं, और उसी के अनुसार बदलाव किए जाते हैं। मौजूदा नेतृत्व हर चीज पर कड़ी नजर रखता है।”
उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ अपनी इस कामयाबी को बनाए रखने के लिए ऑपरेशनल और तकनीकी सुधारों को लागू करना जारी रखेगी।
–आईएएनएस
एससीएच/डीकेपी
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