‘ब्रेकिंग न्यूज आने वाली है’, एकनाथ शिंदे के इस बयान से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल

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मुंबई, 13 जुलाई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख नेता एकनाथ शिंदे द्वारा ‘ऑपरेशन टाइगर’ के संबंध में ‘पिक्चर अभी बाकी है’ की घोषणा बालासाहेब ठाकरे की विरासत की लड़ाई में एक और भी आक्रामक मोड़ का संकेत देती है। यह चेतावनी देते हुए कि ऑपरेशन अभी समाप्त नहीं हुआ है और ‘और भी ब्रेकिंग न्यूज’ आने वाली है, उपमुख्यमंत्री शिंदे विपक्ष के शेष तत्वों को एक स्पष्ट मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक संदेश दे रहे हैं। शिंदे द्वारा एक लोकप्रिय बॉलीवुड संवाद का उपयोग करना अधिकतम मनोवैज्ञानिक व्यवधान पैदा करने के लिए किया गया है। शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा…

मुंबई, 13 जुलाई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख नेता एकनाथ शिंदे द्वारा ‘ऑपरेशन टाइगर’ के संबंध में ‘पिक्चर अभी बाकी है’ की घोषणा बालासाहेब ठाकरे की विरासत की लड़ाई में एक और भी आक्रामक मोड़ का संकेत देती है।

यह चेतावनी देते हुए कि ऑपरेशन अभी समाप्त नहीं हुआ है और ‘और भी ब्रेकिंग न्यूज’ आने वाली है, उपमुख्यमंत्री शिंदे विपक्ष के शेष तत्वों को एक स्पष्ट मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक संदेश दे रहे हैं।

शिंदे द्वारा एक लोकप्रिय बॉलीवुड संवाद का उपयोग करना अधिकतम मनोवैज्ञानिक व्यवधान पैदा करने के लिए किया गया है। शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह को दलबदल कराकर, शिंदे खेमे ने दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल विरोधी दंड से बचने के लिए आवश्यक कानूनी बढ़त (दो-तिहाई बहुमत) हासिल कर ली है।

हालांकि, ऑपरेशन टाइगर 2.0 के खतरे को जीवित रखने से उद्धव ठाकरे (यूबीटी) के बचे हुए कार्यकर्ताओं को स्थिर होने या जवाबी रणनीति बनाने में बाधा आ रही है।

‘पिक्चर अभी बाकी है’ वाक्यांश से संकेत मिलता है कि दल-बदल का सिलसिला केवल नई दिल्ली तक ही सीमित नहीं है। शिंदे गुट यूबीटी के बचे हुए विधायकों और नगर निगम पार्षदों (विशेषकर मुंबई, ठाणे और मराठवाड़ा क्षेत्रों में) को संकेत दे रहा है कि दरवाजे खुले हैं, जिससे बचे हुए लोगों में राजनीतिक अलगाव की भावना पैदा हो रही है।

चल रहे अभियानों को लेकर शिंदे का सार्वजनिक बयानबाजी गठबंधन सहयोगियों के साथ-साथ विपक्ष पर भी लक्षित है।

हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि निरंतर राजनीतिक दांव-पेच से भले ही तुरंत सुर्खियां बटोरी जा सकें, लेकिन लंबे समय तक चलने वाले ऑपरेशन टाइगर में कई संरचनात्मक कमजोरियां हैं।

किसी भी राजनीतिक दल में नेताओं की संख्या सीमित ही रहती है, उसके बाद संस्थागत लाभ (टिकट, मंत्रालय, सरकारी निगमों के अध्यक्ष) खत्म हो जाते हैं। अगर शिंदे विपक्ष के और नेताओं को अपने साथ लाते रहे, तो उनके उन वफादार समर्थकों में आंतरिक विद्रोह भड़क सकता है जो 2022 में उनके साथ थे और राजनीतिक संरक्षण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

–आईएएनएस

एमएस/

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