देहरादून, 7 सितंबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देहरादून में बड़े पैमाने पर जमीन धोखाधड़ी के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया। ईडी ने इस दौरान लगभग 3.24 करोड़ रुपए की अपराध से हुई कमाई के बारे में पूछताछ के लिए एक स्पेशल कोर्ट से उसकी पांच दिन की कस्टडी हासिल की। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने एक बयान में कहा कि नवीन कुमार मित्तल को ईडी देहरादून ने 3 सितंबर को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (पीएमएलए) की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तारी के बाद, मित्तल को देहरादून में स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) के सामने पेश किया गया, जिसने पूछताछ के लिए उसे पांच दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया।
ईडी की जांच उत्तराखंड पुलिस द्वारा देहरादून में जमीन के रिकॉर्ड में हेराफेरी और जमीन की धोखाधड़ी से बिक्री से जुड़ी कई एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद शुरू हुई थी।
बयान में कहा गया है कि पुलिस ने अब तक इनमें से दो एफआईआर में चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें मित्तल को मुख्य आरोपी और धोखाधड़ी का मुख्य फायदा उठाने वाला बताया गया है।
ईडी पहले ही इस मामले में हुमायूं परवेज, मो. वकील और मुकेश कुमार गुप्ता के खिलाफ देहरादून की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अभियोजन शिकायत) दाखिल कर चुकी है।
ईडी ने कहा कि जांच से पता चला है कि मित्तल ने नकली कागजात के जरिए अपने सह-आरोपी को जमीन का असली मालिक बताया और जमीन को अनजान खरीदारों को बेच दिया।
एजेंसी ने बताया कि बिक्री से मिली रकम, जिसमें अपराध से हुई 3.24 करोड़ रुपए की कमाई भी शामिल थी, सह-आरोपी के नाम पर खोले गए बैंक खाते में जमा की गई और बाद में मित्तल के कंट्रोल वाली कंपनियों में ट्रांसफर कर दी गई।
सीएफएसएल (सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) की ओर से बैंक के असली रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच से यह साबित हुआ कि असल में यह खाता मित्तल ही चलाता था।
ईडी ने कहा कि बार-बार समन मिलने के बावजूद मित्तल जांच में शामिल नहीं हुआ, उसने गवाहों को प्रभावित किया, अपने ही रिश्तेदारों को एजेंसी के सामने बयान देने से रोका, और नए नकली कागजात बनाकर गलत लेन-देन को सही दिखाने की कोशिश की।
अगस्त में ईडी की ओर से उसके ठिकानों पर की गई छापेमारी में आपत्तिजनक कागजात और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए। ईडी ने बताया कि जमीन से जुड़े दूसरे धोखाधड़ी के मामलों में भी उसकी भूमिका सामने आई है और उनकी जांच चल रही है।
उत्तराखंड में नकली रेवेन्यू रिकॉर्ड और जाली मालिकाना हक के कागजात के जरिए जमीन की धोखाधड़ी सबसे आम आर्थिक अपराधों में से एक बन गई है। इससे लोगों की जीवन भर की कमाई डूब रही है और जमीन रजिस्ट्रेशन सिस्टम पर जनता का भरोसा कम हो रहा है।
ईडी के बयान में कहा गया है कि मुख्य आरोपी मित्तल की गिरफ्तारी से यह साफ संदेश जाता है कि ऐसी धोखाधड़ी से पैसा कमाने और उसे ठिकाने लगाने वालों को सजा दिलाई जाएगी। साथ ही, पीएमएलए, 2002 के तहत गलत तरीके से हासिल की गई संपत्ति का पता लगाकर उसे जब्त किया जाएगा।
–आईएएनएस
एमएस/
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