ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार पर धर्मेंद्र प्रधान का तंज, कहा- बंगाल में लोकतंत्र को बंदूक की नोक पर रखा जा रहा

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नई दिल्ली, 6 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की “हठधर्मिता” की आलोचना की क्योंकि उन्होंने निवर्तमान मुख्यमंत्री के रूप में राज्यपाल को स्वेच्छा से अपना इस्तीफा सौंपने की संभावना से इनकार कर दिया था। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस द्वारा जवाबदेही का विरोध और जनता के जनादेश को स्वीकार करने से इनकार करना इस बात का उदाहरण है कि बंगाल में लोकतंत्र को बंदूक की नोक पर रखा जा रहा है। धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “बंगाल में लोकतंत्र…

नई दिल्ली, 6 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की “हठधर्मिता” की आलोचना की क्योंकि उन्होंने निवर्तमान मुख्यमंत्री के रूप में राज्यपाल को स्वेच्छा से अपना इस्तीफा सौंपने की संभावना से इनकार कर दिया था।

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस द्वारा जवाबदेही का विरोध और जनता के जनादेश को स्वीकार करने से इनकार करना इस बात का उदाहरण है कि बंगाल में लोकतंत्र को बंदूक की नोक पर रखा जा रहा है।

धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “बंगाल में लोकतंत्र को बंदूक की नोक पर रखा जा रहा है और चुनावी नतीजों को मानने से इनकार करना इस वास्तविकता को उजागर करता है। जनादेश को जनता की आवाज़ की बजाय ऐसे सुझावों की तरह माना जा रहा है जिन्हें अस्वीकार किया जा सकता है। ममता बनर्जी द्वारा जनादेश की भावना को स्वीकार करने से इनकार करना एक गंभीर प्रश्न उठाता है।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “बंगाल की जनता को जनादेश के बाद विनम्रता की उम्मीद थी। लेकिन इसके बजाय हम तृणमूल कांग्रेस द्वारा जवाबदेही से बचने का प्रयास देख रहे हैं। सत्ता पर काबिज रहने की होड़ में ममता बनर्जी न केवल जनता के जनादेश को नकार रही हैं, बल्कि भारतीय चुनाव आयोग और सुरक्षा बलों जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता को भी धूमिल करने का प्रयास कर रही हैं, जिससे स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुरक्षित चुनाव सुनिश्चित करने वाले मूल स्तंभों को ही कमजोर किया जा रहा है।”

धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार, बंगाल लंबे समय से एक ऐसे शासन मॉडल के अधीन रहा है जो धमकी, सिंडिकेट नेटवर्क और गहरे राजनीतिक संरक्षण से चिह्नित है।

ममता का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, “उनका विरोध कोई अपवाद नहीं है। यह उसी व्यवस्था की सबसे स्पष्ट पुष्टि है। सच्चा लोकतंत्रवादी जनता के सामने झुकता है। तानाशाह जनता की परवाह किए बिना सत्ता से चिपके रहता है।”

उन्होंने कहा कि बंगाल का जनादेश डर की अस्वीकृति, जबरदस्ती की अस्वीकृति और जवाबदेही की मांग है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “इसकी अनदेखी करना लोकतांत्रिक वैधता की बुनियाद को ही कमजोर करना है। भारत का संविधान शासन में हठधर्मिता को सद्गुण नहीं मानता। जवाबदेही अनिवार्य है और जनादेश पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।”

यह ऐसे समय में हुआ है जब भाजपा पश्चिम बंगाल में निर्णायक दो-तिहाई बहुमत के साथ अगली सरकार बनाने के लिए तैयार है, जिससे राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत हो जाएगा।

294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 148 है। सोमवार को 293 निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम घोषित किए गए, जबकि दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्टा सीट पर 21 मई को पुनर्मतदान निर्धारित है।

घोषित परिणामों में, भाजपा ने 206 सीटें हासिल कीं, जो तृणमूल कांग्रेस से काफी आगे है, जिसे केवल 81 सीटें मिलीं। तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी भवानीपुर सीट पर भाजपा के सुवेंदु अधिकारी से 15,000 से अधिक वोटों से हार गईं।

–आईएएनएस

एसएके/पीएम

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