तमिलनाडु: 184 अग्निकुंड और 400 शिवाचार्य… मीनाक्षी मंदिर में हुआ भव्य प्राण-प्रतिष्ठा समारोह

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मदुरै, 17 सितंबर (आईएएनएस)। दुनिया भर में मशहूर मीनाक्षी अम्मन मंदिर का महाकुम्भाभिषेकम गुरुवार सुबह पूरे धार्मिक उत्साह और भव्यता के साथ संपन्न हुआ, जिसमें शामिल होने के लिए हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक शहर में पहुंचे। यह प्राण-प्रतिष्ठा समारोह 25 करोड़ रुपये की लागत से महीनों तक चले बड़े पैमाने पर हुए जीर्णोद्धार कार्य के बाद आयोजित किया गया। इस प्रोजेक्ट के तहत, ‘वीरवसंतरायर मंडपम’ का पुनर्निर्माण किया गया और उसे फिर से खोला गया, जो आग लगने की घटना में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। अनुष्ठानों के लिए नॉर्थ आदि स्ट्रीट पर 184 पवित्र अग्निकुंडों वाली एक भव्य…

मदुरै, 17 सितंबर (आईएएनएस)। दुनिया भर में मशहूर मीनाक्षी अम्मन मंदिर का महाकुम्भाभिषेकम गुरुवार सुबह पूरे धार्मिक उत्साह और भव्यता के साथ संपन्न हुआ, जिसमें शामिल होने के लिए हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक शहर में पहुंचे।

यह प्राण-प्रतिष्ठा समारोह 25 करोड़ रुपये की लागत से महीनों तक चले बड़े पैमाने पर हुए जीर्णोद्धार कार्य के बाद आयोजित किया गया। इस प्रोजेक्ट के तहत, ‘वीरवसंतरायर मंडपम’ का पुनर्निर्माण किया गया और उसे फिर से खोला गया, जो आग लगने की घटना में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था।

अनुष्ठानों के लिए नॉर्थ आदि स्ट्रीट पर 184 पवित्र अग्निकुंडों वाली एक भव्य यज्ञशाला स्थापित की गई थी। वहां मीनाक्षी अम्मन और सुंदरेश्वरार नामक प्रमुख देवताओं को समर्पित विशेष स्वर्ण मृदय स्थापित किए गए थे।

कलशों को गंगा, यमुना, कावेरी और वैगई सहित कई नदियों के पवित्र जल से भरा गया था। 400 से अधिक शिवाचार्यों ने इन विस्तृत अनुष्ठानों को संपन्न कराया।

यज्ञशाला पूजा का पहला चरण 11 सितंबर को शुरू हुआ था, जिसके बाद प्रार्थनाओं और अग्नि-अनुष्ठानों के कई दौर चले। इससे पहले 414 परिवारिक देवताओं की प्रतिष्ठा स्थापित की गई थी।

दसवीं यगशाला पूजा के बाद, पवित्र जल के कलशों को हाथियों, मंदिर के मवेशियों और पारंपरिक संगीत के साथ एक भव्य जुलूस में ले जाया गया।

सिद्धि विनायक, कूडल कुमारर, दक्षिणामूर्ति, दुर्गा, महालक्ष्मी, भद्रकाली, अग्नि वीरभद्र, 63 नयनमारों और नवग्रहों सहित अन्य देवी-देवताओं के मंदिरों पर पवित्र जल चढ़ाया गया।

हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में सोने के विमानों, गर्भगृह के शिखरों, मंदिर के 12 गोपुरमों और अन्य संरचनाओं की भी प्राण-प्रतिष्ठा की गई। समापन अनुष्ठान गुरुवार सुबह 3.45 बजे बारहवीं ‘काल यगशाला पूजा’ के साथ शुरू हुए।

पवित्र कलशों को गुरुवार सुबह 5:45 बजे जुलूस में निकाला गया और शिवचार्यों द्वारा उन्हें 12 गोपुरमों तक ले जाया गया, जिनमें चार भव्य राजगोपुरम और स्वर्ण विमान शामिल थे। भक्तिमय मंत्रों के बीच, मीनारों का कुंभाभिषेकम सुबह 7.40 बजे संपन्न हुआ। इसके बाद मीनाक्षी अम्मन और सुंदरेश्वरर के मुख्य गर्भगृहों पर पवित्र जल चढ़ाया गया, जिससे महा कुम्भाभिषेकम संपन्न हुआ।

प्राण-प्रतिष्ठा के बाद विशेष सजावट और दीपाराधना की गई। गुरुवार सुबह 10 बजे से भक्त बिना किसी रोक-टोक के मुख्य देवी-देवताओं की पूजा कर सकेंगे। जो लोग सुबह के समारोह में शामिल नहीं हो पाए, उनके लिए मंदिर प्रशासन ने शाम 7 बजे मीनाक्षी अम्मन और सुंदरेश्वरर की शोभायात्रा का आयोजन किया है, जो चारों मासी सड़कों से होकर गुजरेगी।

इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन के लिए सड़कों को रोशन और सजाया गया है, जिससे मदुरै उत्सव के रंग में रंगा हुआ लग रहा है।

–आईएएनएस

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IANS Agency

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