भाजपा ने ‘सूखे’ को लेकर कर्नाटक सरकार पर कसा तंज, कहा- ‘मंत्री सत्ता संघर्ष में व्यस्त’

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बेंगलुरु, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि जब पूरे राज्य में सूखे की स्थिति बनी हुई है, तब मंत्री सत्ता की खींचतान के लिए दिल्ली जा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस सरकार से आग्रह किया कि वह पीने के पानी के लिए विधान सौध के हर निर्वाचन क्षेत्र को 10-10 करोड़ रुपए जारी करे। मंगलवार को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक पार्टी नेतृत्व की अवहेलना करते हुए दिल्ली जा रहे हैं, जिससे पता चलता है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व का…

बेंगलुरु, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि जब पूरे राज्य में सूखे की स्थिति बनी हुई है, तब मंत्री सत्ता की खींचतान के लिए दिल्ली जा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस सरकार से आग्रह किया कि वह पीने के पानी के लिए विधान सौध के हर निर्वाचन क्षेत्र को 10-10 करोड़ रुपए जारी करे।

मंगलवार को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक पार्टी नेतृत्व की अवहेलना करते हुए दिल्ली जा रहे हैं, जिससे पता चलता है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व का कोई महत्व नहीं है।

उन्होंने बताया कि उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार आंतरिक आरक्षण पर निर्णय लेने के लिए बुलाई गई कैबिनेट बैठक में अनुपस्थित थे। उन्होंने कहा कि यदि शिवकुमार के दिल्ली में होने के दौरान कोई बैठक आयोजित की जाती है, तो यह स्पष्ट रूप से कांग्रेस के भीतर दो गुटों के अस्तित्व को इंगित करता है।

अशोका ने कहा कि हर जगह सूखे की स्थिति और भी गंभीर हो गई है, और पानी की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि मवेशियों के लिए पानी नहीं है, और लोग भी पीने का पानी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे समय में, उन्होंने टिप्पणी की, यदि मंत्री दिल्ली की यात्रा कर रहे हैं, तो इसे केवल ‘मृत सरकार’ ही कहा जा सकता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा पीने के पानी के लिए एक रुपया भी जारी नहीं किया गया है। तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि वहां कर्मचारियों के वेतन में कटौती की गई है और चेतावनी दी कि कर्नाटक को भी इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने मांग की कि बोरवेल के जीर्णोद्धार और टैंकर से पानी की आपूर्ति के लिए प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र को 10 करोड़ रुपए जारी किए जाएं। उन्होंने गौशालाओं की तत्काल स्थापना और मवेशियों के लिए चारे की आपूर्ति का भी आह्वान किया।

मौसम विभाग की उस रिपोर्ट का हवाला देते हुए जिसमें सामान्य से कम वर्षा का अनुमान लगाया गया है, उन्होंने कहा कि यदि सरकार कार्रवाई नहीं कर सकती है, तो मंत्रियों को दिल्ली में ही रहना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि यदि वे शेष दो वर्ष दिल्ली में ही बिताते हैं, तो राज्य में विकास संभव नहीं होगा।

अशोका ने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के कोरे बयान किसी काम के नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक किसी भी निर्वाचन क्षेत्र को कोई धनराशि जारी नहीं की गई है, और वित्त विभाग को कोई आदेश जारी नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।

बेंगलुरु के बुनियादी ढांचे के संबंध में, उन्होंने कहा कि सरकार दावा करती है कि सड़कों के गड्ढे भर दिए गए हैं, लेकिन वे अभी भी जमीन पर दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने यह दिखा दिया है कि गड्ढे भरने के काम से भी पैसे कैसे कमाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि बेंगलुरु के विधायकों की एक सदन समिति गठित की जाती है, तो वे एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे और यह उजागर करेंगे कि किस तरह फर्जी बिल बनाए गए हैं।

‘जनेऊ’ (पवित्र धागा) वाली घटना पर, उन्होंने कहा कि कथित तौर पर कृपा निधि कॉलेज में पवित्र धागा हटा दिया गया था। उन्होंने कहा कि जब पहली बार ऐसी कोई घटना हुई थी, तभी सरकार को सख्त आदेश जारी करने चाहिए थे।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार की विफलता के कारण ही बार-बार ऐसी घटनाएं हो रही हैं। कांग्रेस के अपने सदस्यों ने भी ऐसे कामों का विरोध किया है, फिर भी सरकार ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस परोक्ष रूप से ऐसी घटनाओं का समर्थन कर रही है।

उन्होंने आगे कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आती है, तो वह सख्त नीतियां बनाएगी और सजा सुनिश्चित करेगी, जिसमें ऐसे कामों का समर्थन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल होगी।

उन्होंने यह भी मांग की कि सरकार उमर खालिद से जुड़े किसी भी कार्यक्रम के लिए अनुमति न दे। उन्होंने कहा कि इससे यह पता चलेगा कि कांग्रेस देशद्रोहियों के साथ खड़ी है या देशभक्तों के साथ।

उन्होंने आगे कहा कि देशद्रोह के मामले में जेल में बंद किसी व्यक्ति का महिमामंडन करने की कोई जरूरत नहीं है। अगर पुलिस विभाग अनुमति रद्द नहीं करता है, तो अधिकारियों को इसके लिए जवाब देना होगा।

मंगलुरु कुकर धमाका मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवादी को मौत की सजा दी जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि अगर उसे जेल से रिहा किया जाता है, तो वह ऐसे काम जारी रखेगा। सरकार को और कड़ी सज़ा के लिए हाई कोर्ट में अपील करनी चाहिए। नहीं तो, इसे ऐसे तत्वों का पक्ष लेने के तौर पर देखा जाएगा।

–आईएएनएस

एससीएच

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