बेंगलुरु/नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को बंगाल कोयला तस्करी घोटाले के सिलसिले में प्रशांत किशोर के स्वामित्व वाली आई-पीएसी से जुड़े कई मवेशियों पर छापेमारी की।
बेंगलुरु, दिल्ली और हैदराबाद में कई जगहों पर छापे मारे गए। प्रशांत किशोर अभी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अहम विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति बनाने में मदद कर रहे हैं।
अधिकारियों ने पुष्टि की कि यह पूरे भारत में चलाया जा रहा एक ऑपरेशन है। ईडी की टीमें, स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर, सुबह आई-पैक के दफ्तर पहुंचीं और तलाशी और जब्ती का काम शुरू किया।
याद दिला दें कि ईडी के अधिकारियों ने पहले भी पश्चिम बंगाल में आई-पैक के दफ्तरों पर छापे मारे थे; उस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद दफ्तर पहुंची थीं, जिससे काफी हंगामा हुआ था, क्योंकि उन्हें मीडिया के सामने फाइलें लेकर जाते हुए देखा गया था।
ईडी ने चिंता जताई और अपने काम में कथित रुकावट पर कड़ा एतराज जताया। एजेंसी ने पहले हाई कोर्ट और बाद में भारत के सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) से एक स्वतंत्र जांच की मांग की; इसके लिए एजेंसी ने राज्य सरकार के कथित दखल और एक निष्पक्ष जांच की जरूरत का हवाला दिया। हालांकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि केंद्रीय एजेंसी ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है।
अधिकारियों ने बताया कि कोयला घोटाले की चल रही जांच के तहत, ईडी ने अब नए सिरे से छापे मारे हैं।
छापों के बारे में और जानकारी का इंतजार है, क्योंकि ईडी ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि उनके पास इस घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत मौजूद हैं।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बेंगलुरु में आई-पैक से जुड़े एक व्यक्ति के घर की भी तलाशी ली गई।
आरोप है कि अपराध से कमाए गए लगभग 10 करोड़ रुपए हवाला चैनलों के जरिए आई-पैक तक पहुंचाए गए; बताया जाता है कि इस फर्म को 2022 के गोवा विधानसभा चुनावों में अपनी भूमिका के लिए अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस से पेमेंट मिली थी।
यह ध्यान देने लायक है कि पश्चिम बंगाल कोयला तस्करी मामला, जो 2020 में शुरू हुआ था, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के लीज वाले इलाकों से कोयले की अवैध खुदाई और चोरी से जुड़ा है; इस चोरी की कीमत सैकड़ों करोड़ रुपए होने का अनुमान है। मुख्य आरोपी अनूप माझी (लाला) के नेतृत्व वाले इस गिरोह में ईसीएल के अधिकारी और सीआईएसएफ के जवान शामिल हैं, और इसमें कई राजनेता और कंसल्टेंसी फर्म भी फंसे हुए हैं।
अनूप माझी ने 2024 में आसनसोल की विशेष सीबीआई अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था, और इस मामले में कई अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ईडी की जांच से इन फंड्स और राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के बीच संबंधों का पता चला है।
ईडी ने पश्चिम बंगाल सरकार पर अपनी जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया है, जिसके चलते संघीय एजेंसियों और राज्य के अधिकारियों के बीच कानूनी कार्रवाई और तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।
–आईएएनएस
एससीएच
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