टीएमसी की नए चुनाव की मांग अव्यावहारिक, राजनीतिक निराशा में दिए जा रहे बयान: अधीर रंजन चौधरी

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नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में बढ़ते आंतरिक विवाद के बीच पार्टी नेताओं के हालिया बयानों को खारिज कर दिया। नए सिरे से चुनाव कराने की मांग पर उन्होंने कहा कि ये बयान राजनीतिक झटकों के बाद उपजी हताशा और निराशा का संकेत हैं। तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी की बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि नए सिरे से चुनाव कराने की मांग और बयानबाजी अव्यावहारिक है और यह राजनीतिक निराशा को दिखाती है। उन्होंने आईएएनएस से ​​कहा कि पागल की तरह बात…

नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में बढ़ते आंतरिक विवाद के बीच पार्टी नेताओं के हालिया बयानों को खारिज कर दिया। नए सिरे से चुनाव कराने की मांग पर उन्होंने कहा कि ये बयान राजनीतिक झटकों के बाद उपजी हताशा और निराशा का संकेत हैं।

तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी की बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि नए सिरे से चुनाव कराने की मांग और बयानबाजी अव्यावहारिक है और यह राजनीतिक निराशा को दिखाती है।

उन्होंने आईएएनएस से ​​कहा कि पागल की तरह बात करने का कोई मतलब नहीं है। ऐसा नहीं हो सकता। यह कोई स्थानीय गांव या मोहल्ले की कुश्ती प्रतियोगिता नहीं है जहां एक बार हारने पर कोई आधे घंटे बाद फिर से लड़ सकता है। यह निराशा की अभिव्यक्ति है।

सोमवार को तृणमूल सांसदों के एक समूह और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के बीच हुई बैठक ने पार्टी के भीतर नया विवाद खड़ा कर दिया। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कल्याण बनर्जी ने सांसदों पर भाजपा की ओर झुकाव का आरोप लगाया और कहा कि वे अब पीएम नरेंद्र मोदी को अपना नेता मानते हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने तृणमूल के भीतर बढ़ती बगावत पर भी टिप्पणी की, जब पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार सांसदों के बागी गुट के चेहरे के रूप में सामने आईं।

दस्तीदार की हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि देश के लिए काम करना कोई अपराध नहीं है। इतने सालों तक टीएमसी में रहने के बाद शायद उन्हें देश के लिए काम करने का मौका नहीं मिला। अब चुनाव हारने के बाद सारे काम याद आ रहे हैं। यह उनकी अपनी पसंद है।

पश्चिम बंगाल के बारासात निर्वाचन क्षेत्र से चार बार की लोकसभा सांसद और पेशे से डॉक्टर काकोली घोष दस्तीदार, हाल के वर्षों में तृणमूल द्वारा सामना किए गए सबसे बड़े संसदीय विद्रोह के केंद्र में उभरी हैं।

वरिष्ठ सांसद बागी तृणमूल सांसदों के एक समूह का नेतृत्व कर रही हैं, जिन्होंने संसद में एक अलग गुट के रूप में मान्यता मांगी है, जिससे वे पार्टी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ सीधे टकराव की स्थिति में आ गई हैं।

यह विद्रोह पार्टी के भीतर कई आंतरिक मतभेदों के बाद हुआ है और ऐसे समय में हुआ है जब तृणमूल नेतृत्व को संगठनात्मक एकजुटता को लेकर बढ़ते सवालों का सामना करना पड़ रहा है।

–आईएएनएस

डीकेएम/वीसी

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