बेंगलुरु, 4 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने राज्य सरकार पर किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि अगर किसानों को अपनी मांगों के लिए बार-बार सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया गया तो इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा। भाजपा नेता ने चेतावनी दी कि किसानों के आंसुओं और गुस्से को नजरअंदाज करने वाली कोई भी सरकार जनता के फैसले से बच नहीं सकती।
आर. अशोक ने एक बयान जारी कर कहा कि सूखे जैसे हालात और भीषण जल संकट से जूझ रहे किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार उन्हें फिर से आंदोलन के लिए मजबूर कर रही है। उन्होंने इसे सरकार की किसान विरोधी सोच का प्रमाण बताया।
उन्होंने मंड्या में चल रहे किसानों के आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि किसान अपनी खड़ी फसलों को बचाने के लिए कृष्णराज सागर (केआरएस) बांध से सिंचाई नहरों में पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं। यह आंदोलन सरकार की पूरी तरह विफलता को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि हालात इतने खराब हो चुके हैं कि किसान बेंगलुरु-मैसूर हाईवे पर धरना देते हुए वहीं खाना बना रहे हैं और भोजन कर रहे हैं, ताकि उन्हें सिंचाई के लिए उनका हक का पानी मिल सके। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कर्नाटक ने इससे पहले कभी इतनी असंवेदनशील सरकार देखी है?
भाजपा नेता ने आंदोलन कर रहे किसानों पर पुलिस कार्रवाई की भी आलोचना की। उनका आरोप है कि जब किसान कावेरी नीरावरी निगम के कार्यालय का घेराव करने पहुंचे, तब 100 से अधिक किसानों को हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने पूछा, “क्या पानी मांगने वाले किसानों को गिरफ्तार करना और डराना ही सरकार का जवाब है?”
आर. अशोक ने दावा किया कि केआरएस कमांड क्षेत्र में गन्ने सहित हजारों एकड़ फसल सिंचाई के पानी की कमी के कारण सूख रही है। इससे किसानों की आजीविका और उनके परिवारों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से अपील करते हुए कहा कि किसानों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर करना सुशासन नहीं है। सरकार को तुरंत केआरएस बांध से सिंचाई नहरों में पानी छोड़ना चाहिए, ताकि खड़ी फसलों को बचाया जा सके। उन्होंने यह भी मांग की कि यदि फसलों का नुकसान होता है तो इस मानसून सीजन में प्रभावित प्रत्येक किसान को 50 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए।
आर. अशोक ने राज्य सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि दावणगेरे जिले के जगलूर सरकारी स्कूल की स्थिति पूरे कर्नाटक के सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीर पेश करती है।
उनके अनुसार, इस स्कूल में 600 से अधिक छात्र पढ़ते हैं, जिनमें 300 से ज्यादा छात्राएं शामिल हैं, लेकिन पानी की कमी और खराब रखरखाव के कारण स्कूल के शौचालय बंद पड़े हैं। मजबूरी में छात्राओं को स्कूल परिसर के बाहर खुले स्थान का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि शौचालयों के निर्माण पर लाखों रुपए खर्च किए गए, लेकिन वे उपयोग के लायक नहीं हैं। भाजपा नेता ने सवाल किया कि यह पैसा आखिर गया कहां? क्या यह मंत्रियों, विधायकों, अधिकारियों और ठेकेदारों की जेब में चला गया?
आर. अशोक ने यह भी कहा कि बारिश के दौरान स्कूल की कक्षाओं में पानी टपकता है और खिड़कियों के शीशे भी टूटे हुए हैं, जिससे बच्चों को असुरक्षित माहौल में पढ़ाई करनी पड़ रही है।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को संबोधित करते हुए, उन्होंने आग्रह किया कि वह स्वयं जगलूर स्कूल का दौरा करें और जिला प्रभारी मंत्री को वहां जल्द से जल्द बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दें। साथ ही, उन्होंने सरकार से बिना किसी देरी के पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री नियुक्त करने और शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देने की भी मांग की।
–आईएएनएस
वीकेयू/डीकेपी
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