सरकार ने स्टेम सेल थेरेपी को रेगुलेट करने के लिए जारी की एडवाइजरी

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नई दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। सरकार ने गुरुवार को कहा कि उसने स्टेम सेल थेरेपी को रेगुलेट करने के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि यह थेरेपी रेगुलर क्लिनिकल प्रैक्टिस में स्टैंडर्ड केयर के तौर पर सिर्फ उन्हीं बीमारियों या स्थितियों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है जिन्हें हेल्थ मिनिस्ट्री ने मंजूरी दी है। ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) के मामले में, एडवाइजरी में कहा गया है कि ऑटिज़्म के इलाज में किसी भी तरह के स्टेम सेल का इस्तेमाल सिर्फ मंजूरशुदा क्लिनिकल ट्रायल्स तक ही सीमित रहेगा और यह ‘स्टेम सेल रिसर्च के लिए…

नई दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। सरकार ने गुरुवार को कहा कि उसने स्टेम सेल थेरेपी को रेगुलेट करने के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि यह थेरेपी रेगुलर क्लिनिकल प्रैक्टिस में स्टैंडर्ड केयर के तौर पर सिर्फ उन्हीं बीमारियों या स्थितियों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है जिन्हें हेल्थ मिनिस्ट्री ने मंजूरी दी है।

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) के मामले में, एडवाइजरी में कहा गया है कि ऑटिज़्म के इलाज में किसी भी तरह के स्टेम सेल का इस्तेमाल सिर्फ मंजूरशुदा क्लिनिकल ट्रायल्स तक ही सीमित रहेगा और यह ‘स्टेम सेल रिसर्च के लिए नेशनल गाइडलाइंस, 2017’ के मुताबिक होगा।

16 सितंबर की तारीख वाली यह एडवाइजरी उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजी गई है जिन्होंने स्टेम सेल थेरेपी के रेगुलेशन से जुड़े ‘क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन) एक्ट, 2010’ को अपनाया है। यह एडवाइजरी स्टेम सेल रिसर्च और थेरेपी से जुड़े मौजूदा नियमों को फिर से दोहराती है।

एडवाइजरी में स्टेम सेल थेरेपी से जुड़े नियमों का पालन न करने के नतीजों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी, 2026 के अपने फैसले में कहा था कि कानूनी आदेशों का पालन न करने पर कार्रवाई होनी चाहिए। इसमें आईएमसी रेगुलेशंस, 2002 के रेगुलेशन 7.22 के तहत प्रोफेशनल मिसकंडक्ट (पेशेवर कदाचार) के साथ-साथ ‘क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन) एक्ट, 2010’ की धारा 32 और 40 के तहत कार्रवाई शामिल है, जिसमें रजिस्ट्रेशन रद्द करने और जुर्माना लगाने का प्रावधान है।

बयान में कहा गया है, “इसलिए मिनिस्ट्री ने संबंधित राज्य और जिला रेगुलेटरी अथॉरिटीज और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स से कहा है कि वे स्टेम सेल रिसर्च और थेरेपी से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।”

इसके अलावा, नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने अपनी एडवाइजरी में फिर से कहा है कि स्टेम सेल थेरेपी सिर्फ़ मंज़ूरशुदा स्थितियों के लिए ही स्टैंडर्ड क्लिनिकल केयर के तौर पर दी जा सकती है।

एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि मंज़ूरशुदा स्थितियों के अलावा स्टेम सेल थेरेपी देना, प्रिस्क्राइब करना, बढ़ावा देना या उसका विज्ञापन करना प्रोफेशनल मिसकंडक्ट माना जाएगा।

बयान के मुताबिक, एनएमसी ने राज्य मेडिकल काउंसिल्स को यह सलाह भी दी है कि वे अपने ध्यान में लाए गए कथित उल्लंघनों के मामलों की जांच करें। अगर उचित प्रक्रिया के बाद किसी रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर द्वारा प्रोफेशनल मिसकंडक्ट साबित होता है, तो लागू कानूनी और रेगुलेटरी प्रावधानों के अनुसार उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

–आईएएनएस

पीआईएम/पीएम

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IANS Agency

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