जेल में बीमार और विदेश में काम के लिए फिट, केरल हाईकोर्ट ने पूर्व डीजीपी से किया सवाल

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कोच्चि, 2 नवंबर (आईएएनएस)। केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) टॉमिन जे. थाचंकरी की विदेश यात्रा की अनुमति मांगने वाली अर्जी पर सवाल उठाए। अदालत ने उनके जेल में रहने के दौरान गंभीर बीमारी के दावे और जमानत मिलने के बाद विदेश में नौकरी करने की उनकी योजना के बीच के विरोधाभास की ओर इशारा किया। जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि अपनी 28 दिन की हिरासत के दौरान वे थाचनकारी जेल अस्पताल में भर्ती थे और सवाल उठाया कि अब वह काम के लिए विदेश जाने की अनुमति कैसे मांग सकते…

कोच्चि, 2 नवंबर (आईएएनएस)। केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) टॉमिन जे. थाचंकरी की विदेश यात्रा की अनुमति मांगने वाली अर्जी पर सवाल उठाए। अदालत ने उनके जेल में रहने के दौरान गंभीर बीमारी के दावे और जमानत मिलने के बाद विदेश में नौकरी करने की उनकी योजना के बीच के विरोधाभास की ओर इशारा किया।

जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि अपनी 28 दिन की हिरासत के दौरान वे थाचनकारी जेल अस्पताल में भर्ती थे और सवाल उठाया कि अब वह काम के लिए विदेश जाने की अनुमति कैसे मांग सकते हैं।

अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है कि उन्होंने दो अलग-अलग बातें कही हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी परिस्थितियों में इस तरह की राहत देने से न्यायपालिका पर जनता के भरोसे पर असर पड़ सकता है।

अदालत ने जेल अधीक्षक से एक रिपोर्ट मांगी है, जिसमें यह बताया जाए कि थाचनकारी असल में कितने दिन जेल अस्पताल में भर्ती रहे, उन्हें किन बीमारियों के लिए इलाज मिला और अपनी चार सप्ताह की हिरासत के दौरान वह कितने दिन अस्पताल से बाहर रहे।

अदालत ने कहा कि इस रिपोर्ट से यह जांचने में मदद मिलेगी कि क्या तथ्यों को देखते हुए उनका विदेश जाने का अनुरोध सही है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी।

रिटायर्ड डीजीपी थाचनकारी ने हाईकोर्ट में एक अर्जी दाखिल कर अपनी जमानत की उस शर्त में ढील मांगी है, जो उन्हें अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़ने से रोकती है। वह अपने काम पर लौटने के लिए विदेश जाना चाहते हैं।

दरअसल, कोट्टायम में जांच आयुक्त और विशेष न्यायाधीश (सतर्कता) ने आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में उन्हें चार वर्ष की जेल और 30.84 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था।

लगभग चार सप्ताह जेल में बिताने के बाद 15 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दी और उन्हें जमानत दे दी। हालांकि अदालत की अनुमति के बिना भारत छोड़ने पर लगी रोक वाली शर्त अभी भी लागू है।

यह मामला काफी चर्चा में रहा है, क्योंकि थाचनकारी केरल के पहले ऐसे रिटायर्ड पुलिस अधिकारी हैं, जिन्हें दोषी ठहराए जाने के बाद जेल भेजा गया था। उनकी इस नई अर्जी के कारण, अब उनकी हिरासत की अवधि और जेल में मिले मेडिकल इलाज की हाईकोर्ट द्वारा जांच की जाएगी।

–आईएएनएस

डीके/वीसी

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IANS Agency

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