अमेरिका के सेक्शन 301 शुल्क में भारत को मिली राहत, कम टैरिफ श्रेणी में रखा गया; जल्द व्यापार समझौते के लिए प्रतिबद्ध: सरकार

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नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि फोर्स्ड लेबर से जुड़े सेक्शन 301 की जांच के दौरान भारत ने पूरे समय अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा। इसी का परिणाम है कि अंतिम फैसले में भारत को अतिरिक्त टैरिफ की निचली श्रेणी में रखा गया है, जिससे भारतीय निर्यात को कई प्रमुख क्षेत्रों में तुलनात्मक लाभ मिलेगा। सरकार ने यह भी दोहराया कि वह अमेरिका के साथ भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को जल्द अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध है। यूएसटीआर ने 23 जुलाई को अमेरिकी व्यापार अधिनियम, 1974 के…

नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि फोर्स्ड लेबर से जुड़े सेक्शन 301 की जांच के दौरान भारत ने पूरे समय अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा। इसी का परिणाम है कि अंतिम फैसले में भारत को अतिरिक्त टैरिफ की निचली श्रेणी में रखा गया है, जिससे भारतीय निर्यात को कई प्रमुख क्षेत्रों में तुलनात्मक लाभ मिलेगा।

सरकार ने यह भी दोहराया कि वह अमेरिका के साथ भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को जल्द अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध है।

यूएसटीआर ने 23 जुलाई को अमेरिकी व्यापार अधिनियम, 1974 के सेक्शन 301 के तहत अंतिम उपायों की घोषणा की थी।

ये उपाय उन 60 अर्थव्यवस्थाओं, जिनमें भारत भी शामिल है, की नीतियों और प्रक्रियाओं की जांच के बाद लागू किए गए हैं। यह जांच फोर्स्ड लेबर से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे लागू करने से जुड़े मामलों को लेकर की गई थी।

यूएसटीआर ने भारत से होने वाले आयात पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त एड वैलोरम ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। यह 2 जून 2026 को प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क की तुलना में कम है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “भारत सरकार ने जांच के दौरान यूएसटीआर के साथ लगातार विस्तृत लिखित प्रस्तुतियां, व्यक्तिगत स्तर पर विचार-विमर्श और सार्वजनिक सुनवाई में भागीदारी के माध्यम से सक्रिय संवाद बनाए रखा। इन निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत को अंतिम उपायों में अतिरिक्त टैरिफ की निचली श्रेणी में रखा गया है, जिससे प्रमुख क्षेत्रों में भारतीय निर्यात को तुलनात्मक लाभ मिलेगा।”

सरकार ने बताया कि अमेरिका को भारत के निर्यात का बड़ा हिस्सा, जिस पर फिलहाल कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता, इस 10 प्रतिशत अतिरिक्त ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेगा। इनमें जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स, स्मार्टफोन और कुछ अन्य निर्दिष्ट उत्पाद शामिल हैं।

इसके अलावा, सेक्शन 232 के तहत पहले से शामिल स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स पर भी यह अतिरिक्त 10 प्रतिशत ड्यूटी लागू नहीं होगी।

सरकार ने कहा कि सेक्शन 232 के तहत लगने वाले शुल्क लगभग सभी देशों पर समान रूप से लागू होते हैं, केवल कुछ सीमित अपवादों को छोड़कर।

इन छूटों के कारण अमेरिका को भारत के कुल निर्यात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा अतिरिक्त 10 प्रतिशत सेक्शन 301 ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेगा।

वहीं, शेष 55 प्रतिशत निर्यात पर यह अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लागू होगा। हालांकि, जांच के दायरे में शामिल अधिकांश अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत पर लगने वाला कुल टैरिफ बोझ अपेक्षाकृत कम रहेगा।

सरकार ने यह भी बताया कि अंतिम उपायों में जिस टेक्सटाइल-विशिष्ट व्यवस्था का उल्लेख किया गया है, उसे अभी स्थापित और लागू किया जाना बाकी है। इस मुद्दे पर भारत, भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के तहत चल रही वार्ताओं के दौरान अमेरिका के साथ लगातार बातचीत कर रहा है।

–आईएएनएस

डीबीपी

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