दुनिया भारत की ओर नई दिशा की उम्मीद से देख रही है, हमें हर स्तर पर खुद को मजबूत बनाना होगा : मोहन भागवत

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नागपुर, 4 जून (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को नागपुर में आयोजित संघ के ‘वार्षिक कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय’ प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में कहा कि वैश्विक मंच पर भारत का समय आ चुका है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल समय आने से काम नहीं चलेगा, बल्कि देश और समाज को अपनी जिम्मेदारियों के लिए पूरी तरह तैयार होना होगा। संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि आज दुनिया भारत की ओर नई दिशा की उम्मीद से देख रही है। ऐसे में भारत को अपनी सामूहिक शक्ति बढ़ानी होगी और हर…

नागपुर, 4 जून (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को नागपुर में आयोजित संघ के ‘वार्षिक कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय’ प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में कहा कि वैश्विक मंच पर भारत का समय आ चुका है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल समय आने से काम नहीं चलेगा, बल्कि देश और समाज को अपनी जिम्मेदारियों के लिए पूरी तरह तैयार होना होगा।

संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि आज दुनिया भारत की ओर नई दिशा की उम्मीद से देख रही है। ऐसे में भारत को अपनी सामूहिक शक्ति बढ़ानी होगी और हर स्तर पर खुद को मजबूत बनाना होगा।

उन्होंने कहा, “भारत दुनिया को नई दिशा देने के लिए बना है, लेकिन केवल समय के भरोसे बैठने से यह लक्ष्य हासिल नहीं होगा। समय आ गया है, अब समाज को आगे बढ़कर अपनी भूमिका निभानी होगी और पूरी तैयारी करनी होगी।”

मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू समाज आज पहले की तुलना में अधिक जागरूक, सक्रिय और अपनी पहचान को लेकर सजग हुआ है। इस सामूहिक जागरूकता के सकारात्मक परिणाम अब पूरे देश में साफ दिखाई दे रहे हैं।

उन्होंने वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया इस समय गंभीर भू-राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता से गुजर रही है। कई देश आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने अमेरिका-ईरान तनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का असर सीधे भारत में ईंधन और तेल की कीमतों पर पड़ता है।

मोहन भागवत ने कहा कि भारत को अपनी सांस्कृतिक विरासत, मूल्यों और सोच के आधार पर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि जिन देशों ने कभी भारत को गुलाम बनाया था, वे सांस्कृतिक या बौद्धिक रूप से हमसे श्रेष्ठ नहीं थे।

उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक व्यवस्था में अक्सर ताकत की भाषा को ही महत्व दिया जाता है। दुनिया उसी की सुनती है जिसके हाथ में मजबूत लाठी होती है। भारत सच बोलता है, लेकिन कई बार उसकी बात इसलिए नहीं सुनी जाती क्योंकि दुनिया केवल शक्ति को महत्व देती है। इसलिए भारत को निर्विवाद रूप से मजबूत बनना होगा।

संघ प्रमुख ने कहा कि भारत एक ‘धर्मप्राण राष्ट्र’ है। भारत का उद्देश्य किसी पर प्रभुत्व जमाना या उसे जीतना नहीं, बल्कि दुनिया को धर्म, संतुलन और सही जीवन का मार्ग दिखाना है।

संबोधन में उन्होंने कहा कि आरएसएस का कार्य किसी संगठन की प्रसिद्धि या व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं है। हमारा अंतिम लक्ष्य राष्ट्र का उत्थान है। यदि यह काम संघ का नाम लिए बिना भी पूरा हो जाए, तो यह भी हमारे लिए स्वीकार्य और बेहतर है।

समारोह में देश के प्रमुख उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

–आईएएनएस

वीकेयू/

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