गगनयान मिशन के लिए आईएडीटी-02 के सफल समापन पर इसरो को मंत्री जितेंद्र सिंह ने दी बधाई

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नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) को भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के दूसरे एकीकृत वायु अपवाह परीक्षण (आईएडीटी-02) के सफल समापन पर बधाई दी। गगनयान मिशन 2027 में लॉन्च होने वाला है। उन्होंने इस उपलब्धि को महत्वाकांक्षी मिशन की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिंह ने लिखा, “भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान, गगनयान के लिए दूसरे एकीकृत वायु निकासी परीक्षण के सफल समापन के लिए इसरो को बधाई, जो अगले…

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) को भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के दूसरे एकीकृत वायु अपवाह परीक्षण (आईएडीटी-02) के सफल समापन पर बधाई दी। गगनयान मिशन 2027 में लॉन्च होने वाला है। उन्होंने इस उपलब्धि को महत्वाकांक्षी मिशन की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिंह ने लिखा, “भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान, गगनयान के लिए दूसरे एकीकृत वायु निकासी परीक्षण के सफल समापन के लिए इसरो को बधाई, जो अगले साल निर्धारित है।”

उन्होंने आगे कहा, “सतीश धवन अंतरिक्ष स्टेशन, श्रीहरिकोटा में दूसरा एकीकृत वायु निक्षेप परीक्षण (आईएडीटी-02) सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह गगनयान मिशन की तैयारियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।”

भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन 2027 में श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा। तकनीकी जटिलता के कारण मिशन में कई बार देरी हुई है, लेकिन भारत स्वदेशी रूप से इसकी क्षमता विकसित कर रहा है। गौरतलब है कि अंतरिक्ष मिशन से जुड़ी ऐसी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां गोपनीय रखी जाती हैं और कोई भी देश इन्हें साझा नहीं करता है।

सरकार ने गगनयान कार्यक्रम के लिए लगभग 10,000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। यह मिशन अब अपने अंतिम चरण में है और पहली मानवयुक्त उड़ान 2027 की पहली तिमाही में होने की उम्मीद है।

इससे पहले, 8 अप्रैल को, इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा था कि मानवरहित गगनयान मिशन की सभी तैयारियां सुचारू रूप से चल रही हैं। स्मार्ट स्पेसक्राफ्ट मिशन ऑपरेशंस पर दूसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए उन्होंने कहा, “हम पहले मानवरहित गगनयान मिशन से ठीक पहले मिल रहे हैं। यह कोई साधारण मिशन नहीं, बल्कि भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मिशन है। अंतिम मानवयुक्त प्रक्षेपण से पहले तीन मानवरहित मिशन होंगे। पहले मिशन की सभी गतिविधियां अच्छी तरह से आगे बढ़ रही हैं, हालांकि चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।”

इस सम्मेलन में आईएसआरओ के पूर्व प्रमुख ए.एस. किरण कुमार और एस. सोमनाथ के साथ-साथ आईएसआरओ केंद्र के निदेशक, छात्र और अंतरिक्ष स्टार्टअप के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

इस बीच, भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारियों में 4 अप्रैल को और प्रगति हुई, जब चयनित चार अंतरिक्ष यात्रियों ने लद्दाख में “मिशन मित्रा” (अंतरसंचालनीय विशेषताओं का मानचित्रण और विश्वसनीयता मूल्यांकन) के तहत उच्च ऊंचाई वाला प्रयोग शुरू किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य चरम वातावरण में मानव प्रदर्शन का मूल्यांकन करना है।

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और पी. बालकृष्णन नायर समेत अंतरिक्ष यात्री अनुकूलन के लिए इस सप्ताह की शुरुआत में लेह पहुंचे। इस मिशन को वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, चिकित्सा विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों की एक बहुविषयक टीम का समर्थन प्राप्त है, जो मानव अंतरिक्ष अन्वेषण की दिशा में भारत की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

–आईएएनएस

एसएके/पीएम

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