बेंगलुरु, 7 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के पूर्व मंत्री बी नागेंद्र सोमवार को कथित कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाला मामले में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश हुए। ईडी ने उन्हें समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया था।
बी नागेंद्र बेंगलुरु के जालहल्ली स्थित ईडी कार्यालय पहुंचे, जहां अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की।
अधिकारियों के अनुसार, मामले में चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद और अधिक जानकारी जुटाने के लिए ईडी ने उन्हें तलब किया है।
पूछताछ के दौरान कथित धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग), वित्तीय लेनदेन और मामले से जुड़े बैंक खातों पर सवाल किए जाने की संभावना है।
ईडी जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों के आधार पर नागेंद्र के बयानों की भी जांच करेगी।
सूत्रों के मुताबिक, आगे की जांच पूरी होने के बाद ईडी इस मामले में एक पूरक चार्जशीट भी दाखिल कर सकती है।
नागेंद्र ने इस घोटाले में कथित संलिप्तता के आरोपों को लेकर भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) के लगातार विरोध प्रदर्शन के बाद मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
विवाद के सामने आने से पहले वह युवा सशक्तिकरण, खेल और अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री के रूप में कार्यरत थे।
इससे पहले ईडी ने इस मामले में नागेंद्र को गिरफ्तार भी किया था। बाद में करीब तीन महीने जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी।
अधिकारियों ने कहा कि सोमवार की पूछताछ के दौरान उनकी गिरफ्तारी की संभावना कम है, क्योंकि वह फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
एजेंसी मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच जारी रखे हुए है।
यह मामला कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के धन के कथित अवैध हस्तांतरण और दुरुपयोग से जुड़ा है।
ईडी इस घोटाले से जुड़े धन के प्रवाह और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। जब यह मामला सामने आया था, उस समय बी नागेंद्र राज्य के आदिवासी कल्याण मंत्री थे।
घोटाले के उजागर होने के बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दिया, उन्हें भारी राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ा, और जांच के दौरान जेल भी जाना पड़ा।
राज्य मंत्रिमंडल में संक्षिप्त वापसी के बाद उन्होंने दूसरी बार भी इस्तीफा दे दिया था। इस मामले की जांच तीन प्रमुख एजेंसियां कर रही हैं, जिनमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य सरकार की विशेष जांच टीम (एसआईटी) शामिल हैं।
जांच एजेंसियों ने कई स्थानों पर छापेमारी की है, कई बैंक खातों को फ्रीज किया है, प्रमुख कॉरपोरेट और बैंक अधिकारियों को गिरफ्तार किया है, और आरोपित नेताओं के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति भी मांगी है।
जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर गबन की गई राशि का एक हिस्सा बरामद भी कर लिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने विधानसभा में कहा था कि जांचकर्ताओं ने पाया है कि करीब 84 करोड़ से 89 करोड़ रुपए अनधिकृत खातों में स्थानांतरित किए गए थे।
वहीं, भाजपा का दावा है कि दलितों के लिए आरक्षित 184 करोड़ से 187 करोड़ रुपए की राशि का दुरुपयोग किया गया और उसे देशभर में चुनावी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया।
–आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
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