कोच्चि, 5 नवंबर (आईएएनएस)। केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक न्यायिक अधिकारी को अग्रिम जमानत दे दी। आरोप है कि पिछले महीने उनके नाबालिग बेटे ने मर्सिडीज कार चलाई थी, जिसकी चपेट में आने से सड़क किनारे भोजनालय चलाने वाले 55 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी।
पीड़ित अपनी छोटी सी खाने-पीने की दुकान बंद करके तड़के घर लौट रहा था, तभी एक तेज रफ्तार लग्जरी कार ने उसे टक्कर मार दी।
इस घटना ने लोगों के बीच काफी चिंता पैदा कर दी, खासकर इस बात को लेकर कि एक नाबालिग इतनी महंगी कार कैसे चला रहा था।
अग्रिम जमानत देते हुए केरल हाईकोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि न्यायिक अधिकारी ने जांच में सहयोग किया है।
अदालत ने यह भी बताया कि जांच टीम पहले ही उनसे लगभग छह घंटे तक पूछताछ कर चुकी है। न्यायिक अधिकारी जांच अधिकारियों के सामने पेश हुए और जांच के सिलसिले में उनके सवालों के जवाब दिए।
अदालत का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मृतक का परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है। वे इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और जांच की प्रक्रिया को लेकर उन्होंने चिंता भी जताई है।
सड़क किनारे दुकान चलाने वाले व्यक्ति की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं-जैसे कि एक नाबालिग मर्सिडीज बेंज कैसे चला रहा था और किन हालात में उस गाड़ी का इस्तेमाल हो रहा था।
इस मामले ने लोगों का काफी ध्यान खींचा है क्योंकि आरोपी नाबालिग एक मौजूदा न्यायिक अधिकारी का बेटा है। इसी बीच, एक दूसरी अदालत में नाबालिग बेटे को मिली जमानत को रद्द करने की प्रक्रिया भी चल रही है।
इस मामले में जल्द ही अंतिम आदेश आने की उम्मीद है। जमानत रद्द करने की इस अर्जी के नतीजे पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसका असर आगे चलकर पूरे मामले पर पड़ सकता है।
मृतक के परिवार को अभी भी उम्मीद है कि जांच से पूरी सच्चाई सामने आएगी और जो लोग जिम्मेदार पाए जाएंगे, उन्हें कानून के तहत सजा मिलेगी।
हालांकि, हाईकोर्ट का यह ताजा आदेश, जिसमें न्यायिक अधिकारी को अग्रिम जमानत दी गई है, उनके नाबालिग बेटे को मिली जमानत से जुड़ी कानूनी कार्यवाही से अलग है।
–आईएएनएस
डीकेएम/पीएम
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