केरल में पीएससी और क्राइम ब्रांच के बीच टकराव गहराया, पूछताछ नोटिस को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी

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तिरुवनंतपुरम, 14 सितंबर (आईएएनएस)। राज्य योजना बोर्ड में नियुक्तियों में अनियमितताओं की जांच को लेकर केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) और क्राइम ब्रांच के बीच टकराव और बढ़ने वाला है। आयोग ने अपने सदस्यों को पूछताछ के लिए क्राइम ब्रांच मुख्यालय न भेजने का फैसला किया है। इसके बजाय, पीएससी क्राइम ब्रांच के नोटिस को अदालत में चुनौती देने की तैयारी में है। इससे एक कानूनी लड़ाई की स्थिति बन गई है कि किसी संवैधानिक संस्था के सदस्यों से जांच एजेंसी किस तरह पूछताछ कर सकती है। यह फैसला आयोग के भीतर इस मजबूत राय के बाद लिया गया कि…

तिरुवनंतपुरम, 14 सितंबर (आईएएनएस)। राज्य योजना बोर्ड में नियुक्तियों में अनियमितताओं की जांच को लेकर केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) और क्राइम ब्रांच के बीच टकराव और बढ़ने वाला है। आयोग ने अपने सदस्यों को पूछताछ के लिए क्राइम ब्रांच मुख्यालय न भेजने का फैसला किया है।

इसके बजाय, पीएससी क्राइम ब्रांच के नोटिस को अदालत में चुनौती देने की तैयारी में है। इससे एक कानूनी लड़ाई की स्थिति बन गई है कि किसी संवैधानिक संस्था के सदस्यों से जांच एजेंसी किस तरह पूछताछ कर सकती है।

यह फैसला आयोग के भीतर इस मजबूत राय के बाद लिया गया कि विवादास्पद नियुक्तियों में हुई गड़बड़ियों के लिए उसके सदस्यों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

आयोग की सोमवार को बैठक में यह मुद्दा उठा। सदस्यों ने फिर कहा कि वे बयान देने को तैयार हैं, लेकिन वे पीएससी मुख्यालय में ही ऐसा करेंगे। हालांकि, क्राइम ब्रांच अपने रुख पर कायम है।

चार पीएससी सदस्यों को नोटिस भेजकर मंगलवार से जांच टीम के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया है। एजेंसी का कहना है कि पूछताछ की जगह तय करना जांच अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में है और पीएससी सदस्यों को अपने मुख्यालय बुलाने पर कोई कानूनी रोक नहीं है।

माना जा रहा है कि क्राइम ब्रांच पीएससी को यह बताने पर भी विचार कर रही है कि वह पूछताछ के लिए जगह बदलकर आयोग के मुख्यालय नहीं जाएगी, जिससे यह टकराव और गहरा सकता है।

यह विवाद योजना बोर्ड की दो नियुक्तियों की चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं की जांच के एक अहम चरण में सामने आया है।

क्राइम ब्रांच ने पहले ही पीएससी के दो अधिकारियों की ओर से हुई गड़बड़ियों की पहचान कर ली थी। अब वह यह जांच रही है कि क्या अन्य अधिकारियों और सदस्यों की भूमिका उन गड़बड़ियों से आगे भी थी, जिनकी पहचान पहले ही हो चुकी है।

जिन चार सदस्यों को नोटिस भेजे गए हैं, उनमें से तीन पीएससी चेयरमैन एमआर बैजू के साथ उस विवादास्पद पद के लिए इंटरव्यू बोर्ड का हिस्सा थे। चेयरमैन को अब तक समन नहीं भेजा गया है।

जांच टीम सदस्यों से पूछताछ को अहम मानती है। इसके बाद ही वह उन दो पीएससी अधिकारियों (जिनमें से एक रिटायर हो चुका है) के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगी, जिनकी गलतियां पहले ही सामने आ चुकी हैं।

–आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

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IANS Agency

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