मणिपुर के मुख्यमंत्री ने एकता का आह्वान किया, 36 समुदायों की विरासत को किया याद

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इंफाल, 24 मार्च (आईएएनएस)।मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने मंगलवार को कहा कि राज्य के इतिहास के विभिन्न चरणों में 36 समुदायों ने राज्य की अखंडता की रक्षा करते हुए शांतिपूर्ण सहअस्तित्व बनाए रखा है। इंफाल के बीर टिकेंद्रजीत पार्क (फेदाबुंग) में एंग्लो-मणिपुर युद्ध की याद में आयोजित ‘कांगला हमले’ के स्मरणोत्सव में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने शांति और विकास सुनिश्चित करने के लिए एकता और एकजुटता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने दोहराया कि मणिपुर में सभी समुदाय एक समान पहचान साझा करते हैं, और कहा कि मैतेई मणिपुरी-मैतेई हैं, नागा मणिपुरी-नागा हैं, कुकी मणिपुरी-कुकी हैं…

इंफाल, 24 मार्च (आईएएनएस)।मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने मंगलवार को कहा कि राज्य के इतिहास के विभिन्न चरणों में 36 समुदायों ने राज्य की अखंडता की रक्षा करते हुए शांतिपूर्ण सहअस्तित्व बनाए रखा है।

इंफाल के बीर टिकेंद्रजीत पार्क (फेदाबुंग) में एंग्लो-मणिपुर युद्ध की याद में आयोजित ‘कांगला हमले’ के स्मरणोत्सव में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने शांति और विकास सुनिश्चित करने के लिए एकता और एकजुटता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने दोहराया कि मणिपुर में सभी समुदाय एक समान पहचान साझा करते हैं, और कहा कि मैतेई मणिपुरी-मैतेई हैं, नागा मणिपुरी-नागा हैं, कुकी मणिपुरी-कुकी हैं और मैतेई पंगाल मणिपुरी-मैतेई पंगाल हैं।

उन्होंने आगे कहा कि मणिपुर की अवधारणा ही विभिन्न समूहों के बीच एकता और सहअस्तित्व पर आधारित है।

राज्य के साझा इतिहास को याद करते हुए मुख्यमंत्री सिंह ने कहा कि दशकों से कम से कम 36 समुदायों के लोग मणिपुर की अखंडता की रक्षा करते हुए सद्भावपूर्वक एक साथ रहते आए हैं।

उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण और विकसित मणिपुर के लिए सभी समुदायों के लोगों को एकता, एकजुटता और अखंडता के मूल्यों को बनाए रखना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों और गुमनाम नायकों को पुष्पांजलि अर्पित की। उनके सम्मान में दो मिनट का मौन भी रखा गया।

यह कार्यक्रम एंग्लो-मणिपुरी युद्ध-1891 के शहीदों और कांगलेइपाक (मणिपुर) के स्वतंत्रता सेनानियों पर गठित न्याय समिति द्वारा आयोजित किया गया था और इसमें विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों, छात्रों और अन्य लोगों ने भाग लिया।

1891 का एंग्लो-मणिपुर युद्ध एक राजनीतिक संकट और उसके बाद हुए राजमहल तख्तापलट के कारण शुरू हुआ, जिसके दौरान अंग्रेजों ने राजकुमार टिकेंद्रजीत को गिरफ्तार करने का प्रयास किया, जिसके परिणामस्वरूप कई ब्रिटिश अधिकारियों की मृत्यु हो गई।

आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार युद्ध की पहली गोली अंग्रेजों ने 24 मार्च, 1891 को मणिपुरियों की ओर से बिना किसी उकसावे के चलाई थी।

इम्फाल में शुरुआती दिनों की लड़ाई में, पुखरामबा टांका, खुम्बोंग सूबेदार, लीसांग जमादार और अथोकपा दीवान सहित लगभग 50 मणिपुरी शहीद हो गए।

–आईएएनएस

एमएस/

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