महाराष्ट्र के सभी स्कूलों में मराठी अनिवार्य, उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई: शिक्षा मंत्री

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मुंबई, 13 मार्च (आईएएनएस)। स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने शुक्रवार को विधानसभा को सूचित किया कि महाराष्ट्र के सभी माध्यमों और सभी प्रबंधन बोर्डों के स्कूलों में मराठी भाषा को अनिवार्य विषय बनाने के लिए अधिसूचना लागू कर दी गई है। उन्होंने आगे कहा कि इस नियम का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वे इस मुद्दे पर सदस्य हारून खान द्वारा उठाए गए एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। मंत्री भुसे ने कहा कि 1 मार्च, 2020 की अधिसूचना के अनुसार, शिक्षा का माध्यम या प्रबंधन बोर्ड कोई भी हो, मराठी सभी स्कूलों…

मुंबई, 13 मार्च (आईएएनएस)। स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने शुक्रवार को विधानसभा को सूचित किया कि महाराष्ट्र के सभी माध्यमों और सभी प्रबंधन बोर्डों के स्कूलों में मराठी भाषा को अनिवार्य विषय बनाने के लिए अधिसूचना लागू कर दी गई है।

उन्होंने आगे कहा कि इस नियम का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वे इस मुद्दे पर सदस्य हारून खान द्वारा उठाए गए एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।

मंत्री भुसे ने कहा कि 1 मार्च, 2020 की अधिसूचना के अनुसार, शिक्षा का माध्यम या प्रबंधन बोर्ड कोई भी हो, मराठी सभी स्कूलों में अनिवार्य है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय पाठ्यक्रम का पालन करने वाले विद्यालयों में भी, मराठी को ‘द्वितीय भाषा’ या ‘तृतीय भाषा’ के रूप में पढ़ाया जाना अनिवार्य है। किसी भी परिस्थिति में मराठी को हटाया नहीं जा सकता।

विधायक हारून खान की विशेष शिकायत के बाद, मंत्री ने घोषणा की कि शिक्षा विभाग संबंधित विद्यालय का तत्काल निरीक्षण करेगा।

उन्होंने आगे कहा कि यदि मराठी नहीं पढ़ाई जा रही है, तो प्रबंधन को कानूनी आवश्यकताओं से अवगत कराने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

यह नियम सरकारी, निजी, गैर-सरकारी और सभी विदेशी बोर्ड स्कूलों पर लागू होता है।

मंत्री ने कहा कि चूंकि मराठी राज्य की आधिकारिक भाषा है, इसलिए सरकार यह सुनिश्चित करने में कोई समझौता नहीं करेगी कि नई पीढ़ी इसे सीखे।

नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों को पहले चेतावनी दी जाएगी, और लगातार उल्लंघन करने पर स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जाएगी।

इस बीच, मंत्री भुसे ने घोषणा की कि तीन से छह वर्ष की आयु के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित पूर्व-प्राथमिक शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए, निजी पूर्व-प्राथमिक स्कूलों के अनिवार्य पोर्टल पंजीकरण, विनियमन और गुणवत्ता आश्वासन के लिए कानून लाने की प्रक्रिया चल रही है।

निजी पूर्व-प्राथमिक विद्यालयों के लिए अनिवार्य पोर्टल पंजीकरण का मुद्दा सदस्य मनीषा चौधरी ने उठाया। राज्य, जिला प्रशासन और अभिभावकों के लिए एक केंद्रीकृत डेटाबेस उपलब्ध कराने के उद्देश्य से, 24 अप्रैल, 2025 के सरकारी परिपत्र के माध्यम से ‘पूर्व-विद्यालय पंजीकरण पोर्टल’ पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया था।

मंत्री के अनुसार, विद्यालयों से स्थान, कक्षाओं की संख्या, प्रबंधन, छात्र संख्या, बुनियादी ढांचा, खेल का मैदान, स्वच्छता, पेयजल, सीसीटीवी और कर्मचारियों से संबंधित विवरण प्रदान करने की अपेक्षा की जाती है।

–आईएएनएस

एमएस/

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