कोयंबटूर, 12 सितंबर (आईएएनएस)। मेट्टूर बांध में पानी की आवक में भारी कमी से कावेरी डेल्टा में सांबा धान की खेती के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर किसानों में चिंता बढ़ गई है। वहीं, जलाशय से सिंचाई के लिए अभी भी 12,400 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
शुक्रवार को पानी का बहाव घटकर 1,174 क्यूसेक रह गया, जो बांध से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा से काफी कम है। 7 सितंबर को यह 8,993 क्यूसेक था, जो 9 सितंबर को घटकर 3,718 क्यूसेक और 10 सितंबर को 2,250 क्यूसेक हो गया था।
पानी के बहाव की तुलना में पानी छोड़े जाने की मात्रा काफी अधिक होने के कारण जलाशय का जलस्तर तेजी से गिर रहा है।
बांध के जलाशय का अधिकतम जलस्तर 120 फीट है, जबकि जलस्तर 9 सितंबर के 91.28 फीट से घटकर गुरुवार को 90.52 फीट हो गया। शुक्रवार को यह और गिरकर 89.67 फीट पर आ गया।
यह गिरावट कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा कावेरी जल विनियमन समिति के उस निर्देश को बरकरार रखने के कुछ दिनों बाद हुई है, जिसमें कर्नाटक से तमिलनाडु को 15 दिनों तक रोजाना 6,000 क्यूसेक पानी छोड़ने के लिए कहा गया था।
मेट्टूर बांध के एक अधिकारी ने बताया कि कर्नाटक ने अपने जलाशयों से पानी छोड़ने की मात्रा फिर से बढ़ा दी है और उम्मीद है कि यह नया पानी शनिवार तक तमिलनाडु पहुंच जाएगा। छोड़े गए पानी की सही मात्रा तभी पता चल पाएगी, जब वह राज्य में प्रवेश करेगा।
पानी के आने से मेट्टूर जलाशय को कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है। हालांकि, किसानों को डर है कि अगर पानी की आवक में लंबे समय तक कमी रही तो सांबा धान की खेती पर असर पड़ सकता है, जो कावेरी प्रणाली से समय पर और पर्याप्त सिंचाई पर बहुत ज्यादा निर्भर करती है।
डेल्टा जिलों में खड़ी फसलों को बचाने के लिए मेट्टूर से पानी छोड़ते रहना जरूरी है। लेकिन जलाशय में पानी का स्तर तेजी से घटने से यह सवाल उठने लगा है कि क्या पानी छोड़ने का यह क्रम तब तक जारी रखा जा सकेगा, जब तक कर्नाटक तय मात्रा में पानी का बहाव बनाए नहीं रखता।
तमिलनाडु फेडरेशन ऑफ फार्मर्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी सी. नल्लासामी ने कहा कि डेल्टा के किसानों के लिए पहले से ही सूख रही फसलों को बचाना मुश्किल हो रहा था। ऐसा तब हो रहा था जब कर्नाटक अपनी पहली फसल की कटाई पूरी कर चुका था।
नल्लासामी ने कहा कि पिछले 45 दिनों में छोड़ा गया पानी सांबा की खेती के लिए सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी नहीं था। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आने वाले दिनों में मेट्टूर में पानी का बहाव काफी नहीं बढ़ा, तो पानी की उपलब्धता में और कमी किसानों पर भारी दबाव डाल सकती है और फसल को खतरे में डाल सकती है।
–आईएएनएस
ओपी/एएस
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