तिरुवनंतपुरम, 1 जून (आईएएनएस)। देशभर में लाखों लोग हर साल की तरह केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन का इंतजार कर रहे हैं। दक्षिण-पश्चिमी मानसून भारत में केरल तट से प्रवेश करता है। यह जल्दी ही तट तक पहुंचने की दहलीज पर है। मौसम एजेंसियों ने सोमवार को संकेत दिए कि मानसून जल्द ही केरल तट पर दस्तक दे सकता है। इससे जहां भीषण गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं आने वाले दिनों में भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की गई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अनुमान जताया है कि मानसून के आगमन के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने के साथ ही राज्य में वर्षा गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
इस घटनाक्रम पर पूरे देश की नजर है, क्योंकि केरल में मानसून का आगमन देश के अन्य हिस्सों में इसके आगे बढ़ने का मानक माना जाता है।
भारी बारिश की आशंका को देखते हुए आईएमडी ने इस सप्ताह के लिए सात जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
अलाप्पुझा, कोट्टायम, एर्नाकुलम, त्रिशूर और मलप्पुरम जिलों में बुधवार और गुरुवार को ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि पथानामथिट्टा और कोझिकोड में गुरुवार के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है।
प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इन जिलों के कुछ स्थानों पर कम समय में 11 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश हो सकती है।
इतनी तेज बारिश से शहरी क्षेत्रों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। इसे देखते हुए आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने निगरानी और तैयारियां तेज कर दी हैं।
राज्य के कई अन्य जिलों के लिए येलो अलर्ट भी जारी किया गया है, जिससे संकेत मिलता है कि राज्य के बड़े हिस्से में भारी बारिश हो सकती है।
मानसून के आगमन के साथ केरल के तटीय क्षेत्रों में समुद्री परिस्थितियां उग्र रहने और तेज हवाएं चलने की संभावना है।
प्रशासन ने मछुआरों को मौसम सामान्य होने तक समुद्र में न जाने की सलाह दी है।
एक ओर लोग कई सप्ताह से जारी भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राज्यभर की स्थानीय निकाय संस्थाओं ने मानसून पूर्व तैयारियां तेज कर दी हैं। इसके तहत नालों, नहरों और जल निकासी मार्गों की सफाई की जा रही है, ताकि बाढ़ के खतरे को कम किया जा सके।
असामान्य रूप से गर्म और कठोर गर्मी के बाद, आने वाले दिनों में मानसून की पहली व्यापक बारिश केरल के प्राकृतिक दृश्य को बदल देगी। साथ ही यह उन मौसमी बारिशों की शुरुआत करेगी, जिन पर देश के बड़े हिस्से में कृषि और जल संसाधन काफी हद तक निर्भर रहते हैं।
–आईएएनएस
एएमटी/एएस
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