नई दिल्ली, 7 मई (आईएएनएस)। नीति आयोग ने एक पॉलिसी रिपोर्ट जारी की है, जिसमें भारत की स्कूली शिक्षा व्यवस्था का पिछले एक दशक का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। इस रिपोर्ट में पहुंच और नामांकन, बुनियादी ढांचा, समानता और समावेशन, तथा सीखने के परिणाम जैसे प्रमुख पहलुओं का अध्ययन किया गया है। यह घोषणा गुरुवार को की गई।
नीति आयोग की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निधि छिब्बर ने ‘स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया: टेम्पोरल एनालिसिस एंड पॉलिसी रोडमैप फॉर क्वालिटी एन्हांसमेंट’ शीर्षक वाली रिपोर्ट जारी की।
रिपोर्ट में कुल 13 व्यापक सिफारिशों वाला विस्तृत नीति रोडमैप दिया गया है।
इनमें से 8 व्यवस्थागत सिफारिशों में संयुक्त स्कूलों और साक्ष्य-आधारित तर्कसंगत व्यवस्था के जरिए स्कूल संरचना में सुधार, स्कूल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, प्रशासनिक सुधार और क्षमता निर्माण, स्कूल गुणवत्ता के लिए राज्य और जिला स्तरीय टास्क फोर्स का गठन, स्कूल प्रबंधन समितियों को सशक्त बनाना, शिक्षकों की नियुक्ति और पेशेवर विकास को बढ़ावा देना, डिजिटल और प्रसारण-आधारित शिक्षा का विस्तार, तथा समानता और समावेशन को प्रोत्साहित करना शामिल है।
नीति आयोग के एक बयान के अनुसार, 5 शैक्षणिक सिफारिशों में शिक्षण पद्धति, मूल्यांकन और बुनियादी शिक्षा में बदलाव, समग्र शिक्षा और विद्यार्थियों के कल्याण पर जोर, व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास को नए रूप में लागू करना, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा को मजबूत करना, तथा शिक्षण में नवाचार के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को शामिल करना शामिल है।
रिपोर्ट में यूडीआईएसई+ 2024-25, परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024, एनएएस 2017 और 2021, तथा असर 2024 के द्वितीयक आंकड़ों का उपयोग किया गया है। साथ ही, फरवरी 2025 में नीति आयोग द्वारा आयोजित ‘गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा’ पर राष्ट्रीय कार्यशाला से भी सुझाव लिए गए, जिसमें 150 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था।
भारत की स्कूली शिक्षा व्यवस्था वर्तमान में 14.71 लाख स्कूलों और 24.69 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को कवर करती है, जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी शिक्षा व्यवस्था बनाती है।
रिपोर्ट में देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पहुंच, बुनियादी ढांचा, समानता, समावेशन, डिजिटल एकीकरण और सीखने के परिणामों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
हीट मैप और अन्य दृश्य ग्राफिक्स के माध्यम से रिपोर्ट में यह दिखाया गया है कि स्कूलों में बिजली, कार्यशील शौचालय और समावेशी बुनियादी ढांचे जैसी सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। साथ ही, कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्मार्ट क्लासरूम तक पहुंच बढ़ने से डिजिटल शिक्षा व्यवस्था का भी तेजी से विस्तार हुआ है।
बयान में कहा गया कि अध्ययन से यह भी पता चलता है कि लड़कियों की भागीदारी और अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के नामांकन में विभिन्न शैक्षणिक स्तरों पर सकारात्मक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में सिफारिशों को लागू करने के लिए 33 कार्यान्वयन मार्ग भी दिए गए हैं। इन्हें अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक चरणों में विभाजित किया गया है, साथ ही केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार एजेंसियों की भी स्पष्ट पहचान की गई है।
–आईएएनएस
डीबीपी
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