जम्मू-कश्मीर के शोपियां में स्टीम बॉयलर विस्फोट में यूपी के एक इंजीनियर की मौत, दो घायल

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श्रीनगर, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में एक स्टीम बॉयलर विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बुधवार देर शाम दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के अग्लार के फल मंडी क्षेत्र में एक कोल्ड स्टोरेज यूनिट में विस्फोट हुआ। मरम्मत कार्य के दौरान एक इंजीनियर की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। यह घटना जुम जुम कोल्ड स्टोर में हुई, जब मरम्मत के दौरान एक स्टीमर में विस्फोट हो गया। घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनमें से…

श्रीनगर, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में एक स्टीम बॉयलर विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बुधवार देर शाम दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के अग्लार के फल मंडी क्षेत्र में एक कोल्ड स्टोरेज यूनिट में विस्फोट हुआ। मरम्मत कार्य के दौरान एक इंजीनियर की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। यह घटना जुम जुम कोल्ड स्टोर में हुई, जब मरम्मत के दौरान एक स्टीमर में विस्फोट हो गया।

घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनमें से एक ने दम तोड़ दिया, जबकि दो अन्य का इलाज चल रहा है। मृतक की पहचान सौरभ सिंह के रूप में हुई है, जबकि घायलों की पहचान दिलीप कुमार और राम कुमार के रूप में हुई है।

तीनों उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के निवासी हैं। स्टीम बॉयलर का उपयोग संयंत्र के भीतर हीटिंग, दबाव नियंत्रण या रखरखाव कार्यों के लिए किया जाता है।

यह उच्च दबाव और तापमान के तहत काम करता है और मरम्मत या संचालन के दौरान कोई भी खराबी विस्फोट का कारण बन सकती है, जिससे अगर इसे ठीक से संभाला न जाए तो यह एक उच्च जोखिम वाला घटक बन जाता है। ये तीनों कर्मचारी कोल्ड स्टोरेज सुविधा में मरम्मत का काम कर रहे थे, तभी विस्फोट हुआ।

कोल्ड स्टोर एक तापमान-नियंत्रित इकाई है जिसका उपयोग फलों, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों को खराब होने की प्रक्रिया को धीमा करके और उनकी शेल्फ लाइफ को बढ़ाकर संरक्षित करने के लिए किया जाता है।

राष्ट्रीय बाजारों में फलों, विशेष रूप से सेबों की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने के लिए, दक्षिण कश्मीर के जिलों में कई कोल्ड स्टोरेज इकाइयां स्थापित की गई हैं, जिनमें पके हुए फलों को रखा जाता है ताकि सेबों की कमी होने पर उन्हें घाटी के बाहर के बाजारों में भेजा जा सके।

सेब की फसल को कोल्ड स्टोरेज में रखने की प्रथा शरद ऋतु के महीनों में बड़ी मात्रा में फलों के आगमन के कारण बाजारों में होने वाली अधिकता को भी रोकती है। अधिकता से स्वाभाविक रूप से कीमतों में गिरावट आती है और उत्पादक अक्सर बाजारों में फलों की अधिकता के कारण कम मुनाफे की शिकायत करते हैं।

–आईएएनएस

एसएके/वीसी

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