‘अग्निपथ योजना में किसी भी बदलाव का आधार परिचालन आवश्यकताएं होनी चाहिए’: जनरल द्विवेदी (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

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नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। भारतीय सेना के निवर्तमान प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आईएएनएस को दिए एक साक्षात्कार में अग्निपथ योजना को एक “महत्वपूर्ण मानव संसाधन सुधार” बताया है, जिसका उद्देश्य एक “युवा और भविष्य के लिए तैयार सेना” का निर्माण करना है। भारतीय सेना के निवर्तमान प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आईएएनएस को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि भविष्य में अग्निपथ योजना में किसी भी तरह के सुधार का आधार “परिचालन आवश्यकताएं” और जमीनी अनुभव होना चाहिए न कि “पहले से तय संख्याएं।” अग्निपथ योजना को एक संक्षिप्त अवधि की भर्ती प्रक्रिया बताते हुए उन्होंने कहा कि…

नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। भारतीय सेना के निवर्तमान प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आईएएनएस को दिए एक साक्षात्कार में अग्निपथ योजना को एक “महत्वपूर्ण मानव संसाधन सुधार” बताया है, जिसका उद्देश्य एक “युवा और भविष्य के लिए तैयार सेना” का निर्माण करना है।

भारतीय सेना के निवर्तमान प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आईएएनएस को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि भविष्य में अग्निपथ योजना में किसी भी तरह के सुधार का आधार “परिचालन आवश्यकताएं” और जमीनी अनुभव होना चाहिए न कि “पहले से तय संख्याएं।”

अग्निपथ योजना को एक संक्षिप्त अवधि की भर्ती प्रक्रिया बताते हुए उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम भारतीय सशस्त्र बलों (सेना, नौसेना और वायुसेना) में 17.5 से 21 वर्ष की आयु के युवाओं को “अग्निवीर” के रूप में चार साल के लिए शामिल करता है, जिसमें से 25 प्रतिशत को स्थायी सेवा में रखा जाता है।

योजना पर बात करते हुए जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, “अग्निपथ योजना एक महत्वपूर्ण मानव संसाधन सुधार है, जिसका उद्देश्य एक युवा, अधिक फिट, अधिक ऊर्जावान और भविष्य के लिए तैयार सेना बनाना है। युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और आज के सैनिक को शारीरिक रूप से मजबूत, मानसिक रूप से चुस्त और तकनीकी रूप से सक्षम होना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि प्रारंभिक चरण में यूनिटों से मिले फीडबैक उत्साहजनक रहे हैं। उन्होंने कहा, “अग्निवीर यूनिट जीवन, प्रशिक्षण मानकों और फील्ड आवश्यकताओं के अनुसार अच्छी तरह ढल रहे हैं। ड्रोन, निगरानी प्रणालियों, संचार नेटवर्क और अन्य तकनीक-आधारित प्रणालियों के साथ उनकी अनुकूलन क्षमता सकारात्मक योगदान दे रही है।”

हालांकि उन्होंने कहा कि योजना अभी विकासशील चरण में है। उन्होंने कहा, “पहला बैच अभी अपना पूरा सेवा चक्र पूरा नहीं कर पाया है, इसलिए किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। भारतीय सेना लगातार प्रशिक्षण परिणामों, यूनिट एकीकरण, परिचालन प्रदर्शन और कमांडरों से मिले फीडबैक का विश्लेषण कर रही है।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या भविष्य में अग्निवीर मॉडल में बदलाव की जरूरत है, तो उन्होंने कहा, “किसी भी भविष्य के सुधार का आधार परिचालन आवश्यकताएं और जमीनी अनुभव होना चाहिए, न कि पहले से तय संख्याएं।”

उन्होंने कहा, “यदि भविष्य के आकलन में बदलाव की जरूरत महसूस होती है, विशेषकर वायु रक्षा, ड्रोन, एंटी-यूएएस, सिग्नल्स, निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसे तकनीक प्रधान क्षेत्रों में, तो इस पर संस्थागत स्तर पर विचार किया जा सकता है।”

–आईएएनएस

पीएम

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