हमारा मकसद कभी विधायक या सांसद बनना नहीं, बल्कि बिहार में बदलाव लाना है: प्रशांत किशोर

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पटना, 6 जुलाई (आईएएनएस)। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर उपचुनाव के उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी का मकसद कभी चुनाव जीतना या विधायक या सांसद का पद हासिल करना नहीं रहा है, बल्कि बिहार में सार्थक राजनीतिक बदलाव लाना है। प्रशांत किशोर ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि ‘जन सुराज’ की शुरुआत राज्य के राजनीतिक माहौल को बदलने के मकसद से की गई थी। इसका मकसद वोटरों को जाति, धर्म, पार्टी और नेताओं पर आधारित राजनीति से ऊपर उठकर सोचने के लिए प्रेरित करना था। उन्होंने कहा, “व्यक्तिगत तौर पर और…

पटना, 6 जुलाई (आईएएनएस)। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर उपचुनाव के उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी का मकसद कभी चुनाव जीतना या विधायक या सांसद का पद हासिल करना नहीं रहा है, बल्कि बिहार में सार्थक राजनीतिक बदलाव लाना है।

प्रशांत किशोर ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि ‘जन सुराज’ की शुरुआत राज्य के राजनीतिक माहौल को बदलने के मकसद से की गई थी। इसका मकसद वोटरों को जाति, धर्म, पार्टी और नेताओं पर आधारित राजनीति से ऊपर उठकर सोचने के लिए प्रेरित करना था।

उन्होंने कहा, “व्यक्तिगत तौर पर और ‘जन सुराज’ के विजन के तहत हमारा मकसद कभी विधायक या सांसद बनना नहीं रहा है। राजनीति में आने का हमारा एकमात्र मकसद बिहार में बदलाव लाना है। यह बदलाव तभी आएगा जब लोग जाति, धर्म, पार्टी के प्रति निष्ठा और नेताओं के प्रति अंधी भक्ति से ऊपर उठकर सही उम्मीदवारों को चुनेंगे।”

पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर बात करते हुए प्रशांत किशोर ने माना कि पिछले तीन साल से पूरे बिहार में प्रचार करने के बावजूद ‘जन सुराज’ को चुनाव में जीत के लिए जरूरी जनसमर्थन नहीं मिल पाया है।

उन्होंने कहा, “मैं पिछले तीन साल से कोशिश कर रहा हूं, लेकिन लोगों ने अभी हमें काफी संख्या में वोट नहीं दिया है। नतीजतन, हमें बड़ी हार का सामना करना पड़ा। अगर लोग सच में बदलाव चाहते हैं तो उन्हें किसी विकल्प के लिए वोट करना होगा। तभी एक नई राजनीतिक व्यवस्था बन सकती है।”

प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनावी हार उन्हें अपने मिशन को आगे बढ़ाने से नहीं रोक पाएगी।

उन्होंने कहा, “हार तभी होगी जब मैं हार मान लूंगा। मैंने कोशिश करना नहीं छोड़ा है। चुनाव में हार के बाद भी न तो ‘जन सुराज’ और न ही मैंने एक दिन के लिए भी बिहार छोड़ा। हम लोगों के बीच काम करते रहे हैं।”

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के बारे में किशोर ने कहा कि नतीजा पूरी तरह से वोटरों पर निर्भर करेगा।

उन्होंने कहा, “जीत और हार पूरी तरह से लोगों के हाथ में है। अगर यह हमारे हाथ में होता, तो ‘जन सुराज’ नवंबर में नहीं हारता। हमारी जिम्मेदारी है कि हम ईमानदारी से कोशिश करें और लोगों के सामने एक विकल्प पेश करें। यह जनता को तय करना है कि वे हमारा समर्थन करना चाहते हैं या किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी को चुनना चाहते हैं।”

प्रशांत किशोर ने मौजूदा भाजपा और अब पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे से बांकीपुर विधानसभा सीट खाली होने के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, “अगर भाजपा ने नितिन नवीन को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर इतनी अहम जिम्मेदारी दी थी, तो वह बांकीपुर से विधायक बने रह सकते थे। ऐसा कोई नियम नहीं है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को विधानसभा से इस्तीफा देना ही पड़े। हालांकि राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने राज्यसभा की सीट लेना पसंद किया। यह उपचुनाव भाजपा के नेतृत्व और नीतियों को जनता की मंजूरी परखने का एक मौका है।”

बिहार में भाजपा के नेतृत्व पर निशाना साधते हुए किशोर ने कहा कि लोगों ने सम्राट चौधरी को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर नहीं चुना था, बल्कि पार्टी ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी थी। लोकतंत्र ऐसे ही काम करता है। हालांकि, इस बार लोगों के पास यह बताने का मौका होगा कि क्या वे चाहते हैं कि सम्राट चौधरी उस भूमिका में बने रहें और क्या वे भाजपा के नेतृत्व का समर्थन करते हैं।”

जन सुराज पार्टी के संस्थापक ने रविवार को भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के खाली किए गए बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में उतरने का ऐलान किया और इसे राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज पर एक ‘जनमत संग्रह’ बताया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई इस घोषणा पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने जोरदार तालियां बजाईं, और पूर्व चुनावी रणनीतिकार ने निर्वाचन क्षेत्र के ‘चार लाख मतदाताओं’ से ‘बदलाव लाने के लिए वोट करने’ की अपील की।

नवीन 2006 से बांकीपुर विधानसभा सीट पर थे। इस साल अप्रैल में राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। उपचुनाव 30 जुलाई को होगा।

–आईएएनएस

एससीएच/वीसी

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